क्या कमलनाथ की राष्ट्रीय राजनीति में वापसी होगी

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कांग्रेस का अहमदाबाद अधिवेशन बुधवार को समाप्त हो गया. कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि अधिवेशन के एक महीने के भीतर व्यापक फेरबदल होंगे. 2022 के उदयपुर अधिवेशन में तय किए गए निर्णय कथित जी-23 यानी 23 संतुष्ट नेताओं के समूह के कारण के कारण लागू नहीं हो पाए थे. इसका कारण उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी थी, जो पुराने नेताओं को बरकरार करने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन अब पता चला है कि राहुल गांधी उदयपुर अधिवेशन के सभी निर्णय को संभावित फेरबदल में लागू करेंगे.

हालांकि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी रखा जाएगा ताकि ऐसा ना लगे कि पार्टी भाजपा की तरह कोई मार्गदर्शक मंडल बना रही है. सूत्रों का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे अपना पद छोड़ना चाहते हैं क्योंकि उन्हें घुटने की परेशानी के कारण चलने में तकलीफ होती है. ऐसे में जिन नेताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान दी जा सकती है उनमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और लगभग 7 वर्ष प्रदेशाध्यक्ष रहे कमलनाथ का भी नाम शामिल हो सकता है. दरअसल इसी संभावना की वजह से प्रदेश में जिला अध्यक्षों का फेर बदल रुका हुआ है. कमलनाथ उन जिला अध्यक्षों को हटाने के पक्ष में नहीं हैं, जो उनके समय नियुक्त हुए थे.

ऐसे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को फ्री हैंड नहीं मिल पा रहा है. जाहिर है कमलनाथ के गांधी परिवार से संबंध जीतू पटवारी से कहीं अधिक मजबूत और पुराने हैं. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी प्रदेश राजनीति को छोड़ने का मन अभी नहीं बनाया है. कांग्रेस के प्रथम परिवार से उनके रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं. खास तौर पर सोनिया गांधी को तो वह विवाह के दिन से जानते हैं. ध्यान रहे स्वर्गीय राजीव गांधी और सोनिया के विवाह के समय कमलनाथ ही एकमात्र प्रदेश के नेता हैं जो विवाह समारोह में मौजूद थे. यही वजह है कि सोनिया गांधी कमलनाथ का अभी भी वही लिहाज आज भी करती हैं.

कमलनाथ के रहते जीतू पटवारी के लिए उनके गुट का सफाया करना आसान नहीं होगा. इस समय जीतू पटवारी पूरी तरह से केसी वेणुगोपाल पर निर्भर हैं. इसके अलावा नए प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के कारण भी जीतू टेंशन में हैं. ऐसे में वो कमलनाथ के कितने समर्थक जिला अध्यक्षों को हटा पाएंगे कहा नहीं जा सकता. जीतू पटवारी की भंवर जितेंद्र सिंह से भी नहीं बनी थी. हरीश चौधरी के आने के बाद लग रहा था कि वो नए प्रदेश प्रभारी को सेट कर लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अशोक गहलोत समर्थक हरीश चौधरी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का कहा नहीं टाल सकते. कमलनाथ और दिग्विजय सिंह भले ही आपस में प्रतिस्पर्धा रखते हों लेकिन इन दोनों में से कोई नहीं चाहता कि पटवारी को फ्री हैंड मिले और वो ज्यादा समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहे

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