आरबीआई ने बैंकों के फंसे कर्जों के समाधान के लिए जारी किए मसौदा दिशा निर्देश

मुंबई, 09 अप्रैल (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के फंसे हुए कर्जों (स्ट्रेस्ड एसेट्स) के समाधान के लिए एक नए ढांचे ‘सिक्योरिटाइजेशन ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट्स फ्रेमवर्क’ पर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किया है।

यह नया ढांचा फंसे हुए कर्जे के सिक्योरिटाइजेशन (प्रतिभूतिकरण) को बढ़ावा देगा। सिक्योरिटाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इन फंसे हुए कर्जों को मिलाकर प्रतिभूतियों में बदला जाता है और फिर निवेशकों को बेचा जाता है। इससे बैंकों को जोखिम कम करने और ऐसे कर्जों से निकलने का एक रास्ता मिलेगा।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासक तीन दिवसीय बैठक में लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय बैंक ने इस ढांचे पर जनवरी 2023 में एक चर्चा पत्र जारी कर बाजार के प्रतिभागियों से सुझाव मांगे थे। प्राप्त सुझावों को शामिल करने के बाद अब मसौदा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

श्री मल्होत्रा ने बताया कि यह नया ढांचा बैंकों को फंसे हुए कर्जों के समाधान के लिए एक बाजार-आधारित तंत्र प्रदान करेगा। यह एसएआरएफएईएसआई अधिनियम, 2002 के जरिए समाधान की प्रक्रिया के अतिरिक्त विकल्प के रूप में कार्य करेगा। यह नया विकल्प बैंकों को एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराएगा। मसौदा दिशानिर्देशों पर अब आम जनता और संबंधित हितधारक अपनी राय और सुझाव दे सकते हैं।

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