
सीहोर. जिला अस्पताल परिसर में 30 करोड़ रुपए की लागत से नवीन अस्पताल भवन बनाया गया है. लोकार्पण के बाद यहां पर मेटरनिटी और अन्य विभाग शिफ्ट किए गए हैं. लेकिन अस्पताल का ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है पूर्व की तरह यहां की व्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हैंं.
करोड़ों रुपए की लागत से बने जिला अस्पताल के नए भवन में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव बना हुआ है. यहां रेडियोलाजिस्ट का पद कई सालों से खाली है.जिसके कारण गंभीर रोगों में मरीजों की सोनाग्राफी जांच नहीं हो पाती है, मरीजों को सोनाग्राफी जांच कराने के लिए निजी सेंटरों भेज दिया जाता है जहां पर उन्हें मंहगे दाम चुकाने पडते हैं.
जिला अस्पताल में वर्ष 2019 से रेडियोलाजिस्ट का पद खाली है, इसके बाद से यहां दो रेडियोलाजिस्ट की पद स्थापना तो की गई लेकिन उन्होंने यहां ज्वाईन करना जरूरी नहीं समझा. पद खाली होने से अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजन काफी परेशान होते हैं. मजबूरन उन्हें निजी सोनाग्राफी सेंटरों पर जांच के लिए जाना पड़ रहा है.
जिला अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है. जिसके तहत महिने में दो बार गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है. प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित योजना के तहत महिने की 9 और 25 तारीख को गर्भवती महिलाओं की सोनाग्राफी जांच होती है. कहने को सोनोग्राफी जांच के लिए जहां पर स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया गया है. महिला डाक्टर सोनोग्राफी की जांच करती है, पर यहां सिर्फ गर्भवती महिलाओं की ही जांच होती, जबकि पुरुष मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाता. महिलाओं की जांच के बाद उन्हें हस्त लिखित रिपोर्ट दी जाती है जिसमें एक्स रे फिल्म नहीं होती. जिसके कारण इस रिपोर्ट को डाक्टर मान्यता नहीं देते मजबूरन उन्हें फिर से निजी सेंटरों पर जाकर जांच करानी पड़ती है.
इतना ही नहीं यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सकों की कमी का भी सामना करना पड़ता है. यहां जो चिकित्सक पदस्थ हैं, उनमें से अधिकांश अपनी सीटों से नदारद रहते हैं. मरीजों को उनके कक्ष के बाहर इंतजार करते देखा जा सकता है. इसी तरह वार्डों में भी हालात बदतर बने हुए हैं. हैरत की बात तो यह है कि ओपीडी के बाद मरीजों को इंजेक्शन लगवाने के लिए भी भटकना पड़ता है, क्योंकि नर्स द्वारा अगले दिन आने को कहकर टरका दिया जाता है. इससे प्रतीत होता है कि लोगों को आसानी से इलाज नहीं मिल रहा.
वरिष्ठ अधिकारियों को कराया अवगत
हम इस संबंध में हेल्थ कमिश्नर से कई बार पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन कोई आने को तैयार नहीं है. जिसे देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है. महिला डॉक्टर को सोनोग्राफी का प्रशिक्षण दिलाया गया है. वह महिला मरीजों की सोनोग्राफी करती हैं.
डॉ.सुधीर श्रीवास्तव,
आरएमओ, जिला अस्पताल
पूरे जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है. इस सबंध में हमारे द्वारा हेल्थ कमिश्नर से लेकर मिनिस्टर तक को लिखा जा चुका है. ऐसे में हम प्रायवेट लोगों की सेवाएं लेते हैं.
डॉ.एसके डेहरिया,
सीएमएचओ
