कांग्रेस की बैठकें और अंदरूनी हालात

सियासत

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का एक अधिवेशन 9 और 10 अप्रैल को अहमदाबाद में होने वाला है. इसके लिए बैठकों का दौर जारी है. उदयपुर अधिवेशन के पहले इसी तरह जिला अध्यक्षों की बैठकें हुई थी. कम से कम मध्य प्रदेश के संदर्भ में नतीजा यह निकला कि इंदौर जिला और इंदौर ग्रामीण की कार्यकारिणी कांग्रेस पिछले 7 वर्षों में घोषित नहीं कर पाई. इसके अलावा 2022 के सभी तरह के चुनाव मध्य प्रदेश में कांग्रेस हारी सो अलग.

जाहिर है कांग्रेस का इको सिस्टम एक बार फिर कांग्रेस में बदलाव के हवा बना रहा है. 3 अप्रैल को एक बार फिर मध्य प्रदेश के जिला अध्यक्षों की बैठक दिल्ली ने ली है,लेकिन कांग्रेस में कुछ नहीं बदला है. इसका पता मीनाक्षी नटराजन के उस पत्र से चलता है जो उन्होंने सार्वजनिक किया. जिसमें उन्होंने मुन्ना रघुवंशी को नीमच जिले से एआईसीसी का मेंबर बनाने का सार्वजनिक विरोध किया है. मुन्ना रघुवंशी भोपाल जिले के रहने वाले हैं.

मीनाक्षी नटराजन राहुल गांधी की नजदीकी महासचिव मानी जाती है. उन्हें हाल ही में तेलंगाना में प्रभारी पद दिया गया है. जाहिर है कांग्रेस की इतनी बड़ी और इतनी पहुंच वाली नेता सार्वजनिक रूप से पत्र लिखकर जीतू पटवारी का विरोध कर रही है. इससे यह भी जाहिर हुआ कि कम से कम प्रदेश कांग्रेस में तो कुछ नहीं बदला है और शायद कभी नहीं बदलने वाला है. इसका एक और उदाहरण यह है कि जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश से एआईसीसी के लिए जो नाम स्वीकृत करवाएं हैं, उनमें अरुण यादव और सचिन यादव के नाम नहीं है.

इंदौर से केवल अश्विन जोशी का नाम है, बाकी नाम ऐसे हैं जो पार्षद का चुनाव भी नहीं जीत सकते. बहरहाल 3 अप्रैल की बैठक में पार्टी हाई कमान ने निर्देशित किया है कि साल 2025 को संगठन पर्व की तरह संगठन को मजबूत करने के लिए काम करना है. सेक्टर मंडलम और बूथ को मजबूत करने पर फोकस करना है. दिल्ली से मिले प्रोग्राम्स को प्रमुख रूप से करना है. बताया जा रहा है कि जिला अध्यक्षों को बड़े अधिकार मिल सकते हैं. इस बैठक में विधानसभा-लोकसभा की टिकट के अधिकार भी जिला अध्यक्षों को देने की बात हुई है.

दरअसल,देशभर में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए दिल्ली में मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों के जिला अध्यक्षों की बैठक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक दिन पहले ली है. बैठक में एमपी के रेंडमली दो जिला अध्यक्षों को अपनी बात रखने के लिए मौका दिया गया. कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला अध्यक्षों ने जिला के अंदर नियुक्तियों का पावर उन्हें देने की मांग की है. हालांकि इस पर पार्टी का कहना है कि पावर तो दिए जाएंगे लेकिन इस पर प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारियों की निगाहें रहेंगी. इस बैठक हुए मंथन के बाद जल्द ही एक नई गाइडलाइन जारी होगी जिसमें जिला अध्यक्षों की भूमिका तय की जाएगी. बहरहाल, अब देखना यह होगा कि अहमदाबाद अधिवेशन के बाद कांग्रेस कितना बदलती है

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