इटारसी। श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर तुलसी चौक में श्री राम जन्म महोत्सव समिति के तत्वावधान में 62वे वर्ष में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में चित्रकूट से आये महेंद्र मिश्र मानस मणि महाराज ने कथा प्रसंग को विस्तार देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम लक्ष्मण जी और माता सीता वन गमन के दौरान ऋषिमुख पर्वत के समीप पहुंचे। सुग्रीव को आशंका हुई यह कहीं बालि के द्वारा भेजे गए दूत ना हों। हनुमान जी ब्राह्मण का वेष बनाकर राजकुमारों के पास पहुंचे और उन्हें देखकर हनुमान जी ने कहा कि आप बीहड़ जंगलों में नंगे पांव चल रहे हैं, साधारण व्यक्ति नहीं हो सकते। जरूर आप ईश्वर का अवतार हैं।
प्रभु श्रीराम ने हनुमंत लाल से कहा कि हम महाराजा दशरथ अयोध्या के पुत्र हैं और पिता की आज्ञा मानकर वन में आए हैं। हनुमान जी ने सभी तरह से संतुष्ट होने के बाद वानर राज सुग्रीव से राम जी का परिचय कराया। योजना के अनुसार प्रभु श्री राम ने बालि का वध किया तब प्रभु श्री राम ने उसको जीवन और मरण की सही बात बताई जो तारा ने स्वीकार की। रावण की लंका को बर्बाद करने और रावण के सर्वनाश के लिए सुग्रीव और उनके साथ हनुमान बड़े योद्धा के रूप में मिले और प्रभु श्री राम इस बात के लिए आश्वस्त हो गए की वानरों की मदद से वह लंका विजय कर लेंगे।
श्री राम कथा में बालि वध के बाद वानर सेना ने प्रारंभ की सीता की खोज
