बढ़ती भाषाई, राजनीतिक खतरों के बीच, दक्षिणी एकता की आवश्यकता पहले नहीं थी: स्टालिन

चेन्नई, 30 मार्च (वार्ता) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने रविवार को कहा कि हिंदी थोपे जाने और परिसीमन जैसी बढ़ती भाषाई और राजनीतिक खतरों को देखते हुए दक्षिणी राज्यों के बीच एकता की आवश्यकता पहले कभी इतनी ज्यादा नहीं थी।

तेलुगु और कन्नड़ भाषी लोगों को उगादि की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने एकता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि हमारे अधिकारों एवं पहचान को कमजोर करने के सभी प्रयास को विफल करने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “मैं अपने सभी तेलुगु और कन्नड़ भाषी द्रविड़ बहनों और भाइयों को खुशहाल उगादि की शुभकामनाएं देता हूं, क्योंकि आप आशा एवं उत्सव के साथ नए साल का स्वागत कर रहे हैं।”

श्री स्टालिन ने कहा कि “हिंदी थोपे जाने और परिसीमन जैसी बढ़ती भाषाई और राजनीतिक खतरों के मद्देनजर, दक्षिणी एकता की आवश्यकता पहले कभी इतनी ज्यादा नहीं थी। हमें एकजुट होकर अपने अधिकारों एवं पहचान को कमजोर करने के सभी प्रयासों को विफल करना होगा।”

उन्होंने कहा कि “यह उगादि प्रतिरोध एवं एकजुटता की भावना को प्रज्वलित करे जो हमें एकजुट रखे।”

 

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