धाराजी घाट से सुनील योगी की रिपोर्ट
बागली: देवास जिले के बागली जनपद में अंतिम छोर पर स्थित धारा जी घाट पौराणिक मान्यता अनुसार नर्मदा का योनी स्थल है। यहां पर डुबकी लगाने से दोहरी जन्म यानी प्रेत बाधा या अन्य बाहरी बाधा से मुक्ति दिलाने का एकमात्र स्थान है। तांत्रिक जानकारी के अनुसार मां नर्मदा की गोद में स्नान करना पुण्य रहता है लेकिन धाराजी घाट पर स्नान करने से प्रेत बाधा और अन्य मानसिक बाधाओ से मुक्ति मिलती है। बड़े बांध की वजह से जहां पर पहले 50 फीट ऊंची धार गिरती थी
वह स्थान अब जलमग्न हो चुका है। फिर भी स्थान का महत्व है अप्रैल 2005 में बांध से पानी छोड़े जाने की वजह से कई जिंदगी पानी में समा गई थी उसके बाद 2007 से यहां पर अघोषित रूप से धारा 144 लागू कर दी गई थी और स्नान पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 2022मे एनएचडीसी की सहमति से यहां पर घाट बनने का काम शुरू हुआ और 2024 से बड़े स्तर पर स्नान शुरू हो गया।
29 मार्च 2025 को यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और रात भर चली तांत्रिक क्रियाएं लोग इसे भूतों का मेला भी कहते हैं जो साक्षात देखने में भी आया कई प्रकार के देवी देवता यहां पर लोगों की बाधा दूर करते नजरआए। जनपद क्षेत्र बागली द्वारा यहां पर श्रद्धालुओं की सुख सुविधाओं का पूरा ध्यान रखते हुए घाट स्थल पर सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जिसमें शौचालय व्यवस्था शुद्ध पेयजल की व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी शामिल रही। उदय नगर थाना प्रभारी कालू सिंह परस्ते अपने दल बल के साथ यहां पर निगरानी रखे हुए दिखाई दिए। तहसीलदार गौरव निरंकारी ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवास जिले सहित अन्य जिले से भी यहां पर स्नान करने आए.
