नयी दिल्ली, 27 मार्च (वार्ता) द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसदों ने गुरुवार को लोकसभा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) कानून की राशि रोके जाने का मुद्दा उठाते हुये करीब चार हजार करोड़ रुपये की इस राशि को तत्काल जारी करने की मांग की।
द्रमुक सदस्य डॉ कलानिधि वीरास्वामी ने शून्य काल में कहा कि तमिलनाडु की मनरेगा के करीब 4000 करोड़ रुपये और शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 2152 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार ने रोक रखे हैं। उन्होंने इन राशियों को तत्काल जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के साथ अन्याय किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
द्रमुक के ही अन्नादुरई ने भी राज्य की मनरेगा की निधि जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की करीब 4000 करोड़ रुपये की राशि लंबित है, इसे रोकना ग्रामीण क्षेत्रों के कामगारों के लिये अन्याय है, अत: केन्द्र सरकार इस निधि को तत्काल जारी करे।
उन्होंने कहा कि सांसदों का वेतन बढ़ा दिया गया है, लेकिन सांसद विकास निधि की राशि नहीं बढ़ायी गयी है। उन्होंने सांसद विकास निधि बढ़ाने की मांग करते हुये कहा कि इससे उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास के कार्य कराये जा सकेंगे और इस तरह लोगों की सहायता की जा सकेगी।
भारतीय जनता पार्टी के बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में कोयला, लौह, बाक्साइट आदि खदानों में खनन के बाद गंदा पानी भरने की समस्या की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुये इन्हें समतल करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इनके खुदाई के बाद खाली रह जाने से दुर्घटनायें होती हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। उन्हें इन खदानों को समतल करवाने की मांग की।
