करों के बोझ से हजारों ने किया पलायन : थरूर

नयी दिल्ली, 24 मार्च (वार्ता) विपक्ष ने सरकार पर आज माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की ऊंची दरों को आम आदमी के लिए दंड करार देते हुए आरोप लगाया कि भारी कर बोझ के कारण देश से हजारों लोग पलायन कर रहे हैं।

लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा पेश वित्त विधेयक 2025 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि यह देश करदाताओं पर बोझ डाले हुए है। उन्होंने एक अंग्रेजी में कर के बोझ को लेकर छंद पढ़ कर सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “हमारे पेट्रोल पर कर लगाओ, हमारी शर्ट पर कर लगाओ, हमारे जूते पर कर, हमारी गंदगी पर कर, हमारे मोबाइल पर कर लगाओ, हमारी कॉल पर कर लगाओ, हमारे फावड़ियों की ढहती दीवारों पर कर लगाओ, हमारे वेतन पर कर, हमारी सवारी पर कर, हमारी माता को पक्ष में कर दो, हमारे दुख पर कर लगाओ, हमारी जयकार पर कर लगाओ, साल दर साल हमारे भविष्य पर कर लगाओ।”

उन्होंने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र का समग्र विकास में योगदान 15 प्रतिशत है जो बहुत कम है। विदेशी पूंजी पर निर्भरता बनी हुई है और उत्पादन बढ़ नहीं रहा है। विकसित भारत 23 साल आगे की बात है और वह सपना उन युवाओं के सहारे देखा जा रहा है जो आज बेरोजगार बैठे हैं। भारत में बहुआयामी गरीबी 15 प्रतिशत के स्तर पर है। उन्होंने कहा कि सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़े पर योजना बना रही है जो आर्थिक वास्तविकताओं से मेल नहीं खा रहीं हैं।

उन्होंने कहा कि देश में आयकर देने वाले मात्र दो प्रतिशत लोग हैं। वही देश चला रहे हैं। गरीबी, महंगाई एवं बेरोजगारी के कारण आयकर दाताओं की संख्या बढ़ नहीं पा रही है। देश में आय का वितरण असमान है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वेतनभोगी वर्ग को जो राहत दी है, उसकी गरीबों से मिलने वाले जीएसटी से भरपाई की जाएगी। भारत में जीएसटी की उच्च दर 28 प्रतिशत और कर राजस्व 18 प्रतिशत है जबकि चीन में 13 प्रतिशत, थाईलैंड में 17 प्रतिशत, विएतनाम में 13 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि देश में दोहरा कर लिया जा रहा है और 70 प्रतिशत देश की आबादी जीएसटी दे रही है। कारोबार मुश्किल में हैं।

श्री थरूर ने कहा कि इनपुट क्रेडिट के दावे सालों से लंबित हैं। ये एक प्रकार का दंड है। उन्होंने कहा कि करीब 35 हजार लोग टैक्स के आतंकवाद के कारण अपनी संपत्ति सहित भारत की नागरिकता छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि बजट में विज़न का अभाव और संकल्प की कमी है जो विकसित भारत की दिशा में नहीं है।

भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का अभिनंदन करते हैं जिनकी दूरदर्शिता के कारण आर्थिक रूप से हिले हुए विश्व में भारत को उम्मीदों का एक चमकीला सितारा बनाये हुए हैं जो दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है।

उन्होंने कहा कि 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था दो लाख करोड़ डाॅलर की थी जो दस साल में आज साढ़े चार लाख करोड़ डाॅलर की हो गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ आदि अनेक बड़ी अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ राजनीति इसी कारण चल रही है।

श्री दुबे ने कहा कि आम बजट जादूगरी का बजट नहीं बल्कि मेहनत मजदूरी का बजट है। कांग्रेस का एक सूत्रीय एजेंडा सरकार की आलोचना करना है। उन्होंने टैक्स जीडीपी अनुपात के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस के जमाने में यह अनुपात 6.5 प्रतिशत था लेकिन आज यह 11.7 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग के लिए 12 से 13 लाख रुपये की आय पर दी गई राहत विपक्ष को अच्छी नहीं लग रही है। शहरों में यदि किसी परिवार में चार सदस्य कमाते हैं तो उन्हें 50 लाख रुपए की आय तक टैक्स नहीं देना पड़ेगा।

उन्होंने कांग्रेस के शासन में कर प्रणाली का विस्तार से वर्णन किया और कहा कि बोफोर्स की दलाली की बात आयकर के रिकार्ड में आने के बावजूद कोई टैक्स नहीं लिया गया। सबको क्लीनचिट दे दी गई थी। उन्होंने रेवेन्यू फाॅरगाॅन और आईटीए – 1 पर कांग्रेस के वाणिज्य मंत्री के हस्ताक्षर का मुद्दा उठाया और कहा इसी वजह से भारत में इलैक्ट्रानिक मैन्युफैक्चरिंग शुरू नहीं हो पाई और गणेश जी की मूर्ति और बिजली की झालर चीन से आती रही।

श्री दुबे ने कहा कि भारत ने कार्पोरेट टैक्स की दरें ऊंची रखीं लेकिन वसूली 22 प्रतिशत ही रही। मोदी सरकार ने दरें कम कीं तो वसूली बढ़ गई।

समाजवादी पार्टी के नीरज मौर्य ने कहा कि जबसे भाजपा की सरकार आई है सबका साथ सबका विकास करने की बात करती है लेकिन यह केवल जुमला साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक (पीडीए) को रुलाना बंद करे। हमारे देश के अंदर कर का सबसे अधिक बोझ है। हम प्रत्यक्ष अप्रयक्ष रूप से कर देते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि आमदनी का पचास फीसदी कर में चला जा रहा है इसे ठीक करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य का बुरा हाल है। सरकारी स्कूलों की दुर्दशा है और प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल रहे है।

समाजवादी के नेता ने कहा कि अपने क्षेत्र आंवला बरेली में एक एम्स की स्थापना करने की मांग की ताकि आम लोगों को बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के एक विधायक ने सरकार को आईना दिखाकर बताई कि किस प्रकार भ्रष्टाचार चल रहा है। डालर के मुकाबले रुपये में गिरावट पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने किसानों के ऋणों का माफ करने की मांग की। जीएसटी की व्यवस्था में बहुत सुधार की आ‌श्यकता है, सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने कहा कि सरकार की कराधान नीति को दो भारत में क्यों बांटा है जिसमें एक तरफ संभ्रांत और दूसरी तरफ गरीब लोग हैं। अभी हमने महाकुंभ देखा। सरकार ने इसकी सफलता के लिए अपनी पीठ थपथपाई लेकिन कुंभ में जान गंवाने वाले लोगों के बारे में कोई चर्चा नहीं की है। उन्होंने कहा कि आम लोगों पर अप्रत्यक्ष कर का बोझ कम करने के लिए सरकार ने कोई काम नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि कोठारी आयोग की रिपोर्ट में भी सिफारिश की गई थी कि शिक्षा पर छह प्रतिशत खर्च किया जाए लेकिन सरकार ने इस मामले में क्या किया। सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में कटौती कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आज 81 करोड़ लोगों को पांच किलो अनाज मिलता है। जनगणना नहीं होने के कारण बडी संख्या में गरीब लोगों को राशन नहीं मिल पा रही है। सरकार आठ करोड असंगठित क्षेत्र के लोगों को राशन नहीं दे रही है। सरकार प्रजातंत्र में चुनावी प्रक्रिया सही हो उस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कारपोरेट की मदद कर रहे हैं लेकिन आम लोगों की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह आर्थिक कुप्रबंधन है। यहां कर की दरें अलग अलग है उससे भ्रम की स्थिति की पैदा होती है।

उन्होंने कहा कि क्या सरकार इलेक्टोरल बांड को किसी अन्य रूप में लेकर आने की कोशिश कर रही है जबकि उच्चतम न्यायालय ने इसे असंवैधिक घोषित कर दिया है। वित्त विधेयक कराधान की बात नहीं कर रही है सिर्फ कर चोरी के बारे में बात कर रही है। जहां नब्बे प्रतिशत लोगों को करों से छूट है वहां किसके खिलाफ कराधान को सख्त बनाने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियां सही नहीं है और मैं उसका विरोध करती हूं।

द्रमुक के कलानिधि वीरास्वामी ने कहा कि दिल्ली चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार ने कर में बारह लाख तक छूट दी जिसमें उनको सफलता मिल गई है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया कि सभी को सब कुछ मिलना चाहिए और सरकार ने उस दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में छात्रों को प्रोत्साहन राशि देकर शिक्षा की दिशा में बेहतक काम किया है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में बार बार आपदा आती रहती है लेकिन सरकार से जो राशि की मांग की गई है वह नहीं मिल पाई है। विपदा के दौरान जो लोगों को नुकसान हुआ लेकिन उसको लेकर केन्द्र सरकार को कोई चिंता नहीं है। सरकार तीन भाषा सूत्र की बात कर रही है लेकिन उनके राज्य में यह लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी कर आतंकवाद के अलावा कुछ नहीं है। इसमें असंवैधानिक तरीके से काम किया जा रहा है जो बहुत शर्मनाक है। जीएसटी पर पुनर्विचार करने की जरुरत है। इलेक्टोरल बांड एक वसूली पद्धति थी जिसे सरकार फिर से लाने की कोशिश कर रही है।

जनता दल (यू) के दिलेश्वर कामैत ने चर्चा में शामिल होते हुये कहा कि सरकार ने आयकर, प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर, सीमा शुल्क, सेवाकर जैसे कई अधिनियमों की धाराओं में संशोधन किया है, जो सरकार का बड़ा सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि बजट में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों को कोई आयकर न देने का प्रावधान करना स्वागत योग्य कदम है।

श्री कामैत ने कहा कि बजट में किसानों के लिये विशेष प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने कहा कि केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाया जायेगा, 36 जीवन रक्षक दवाओं के दाम कम करने का प्रावधान है। कुल मिलाकर यह यह बजट राष्ट्रहित, जनहित और किसानों के हित में है।

शिवसेना(यूबीटी) के अनिल देसाई ने कहा कि दालों के आयात पर निर्भरता ठीक नहीं है। आज भी बहुत से किसानों को कर्ज नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दो अप्रैल से आयात पर जवाबी कर लगाने की घोषणा की है, इससे कैसे निपटा जायेगा, यह बताया जाना चाहिये।

उन्होंने कहा कि देश में सरकारी अस्पतालों की कमी है, जो अस्पताल हैं भी उनमें चिकित्सकों की कमी है, कर्मचारियों की कमी है, इस पर तत्काल ध्यान दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है, इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिये।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले ने कहा कि विश्व में बदलाव हो रहा है और अमेरिका में जो कुछ भी हो रहा है, इसे देखते हुये भारत चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है। नौकरियां कम होती जा रही हैं, महंगाई बढ़ रही है, खाद्यान्न का संकट पैदा हो रहा है। इस पर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिये।

सुश्री सुले ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में राजकोषीय प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट रूप से कहना चाहिये कि किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि जो कर का भुगतान करना चाहते हैं, वे भयभीत न हों।

कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमाेहन सिंह ने जो आर्थिक सुधार शुरू किये थे, उन्हीं की वजह से भारत आज इस स्थिति में पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों की मदद करनी चाहिये।

श्री औजला ने कहा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का न्यायाधिकरण बनाना था, जो अब तक गठित नहीं हो सका, उसे गठित किया जाना चाहिये। वर्तमान सरकार की नीतियों की वजह से अमीर लोग और अमीर हो रहे हैं, दूसरी तरफ 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन देना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजाब पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, इस राज्य ने संकट के समय हमेशा देश का साथ दिया है। अमृतसर में उद्योग तबाह हो रहे हैं, इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में स्कूूल खोलने और उनमें सुधार की जरूरत है।

भाजपा के अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि पूरी दुनिया भारतीय अर्थव्यवस्था की तरफ देख रही है, क्योंकि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और दुनिया अगले एक दशक तक भारत की तरफ इसी तरह से देखती रहेगी। वित्त विधेयक में विकासित भारत का संकल्प लिया गया है और इसमें युवाओं को रोजगार देने, महिलाओं को सशक्त बनाने , मघ्यम वर्ग को करों से राहत देने और कर व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाना है। उनका कहना था कि उन्हीं करदाताओं को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए कर में छूट की व्यवस्था का लाभ मिलेगा जो भारत में पैसा लगाना चाहेंगे। मोदी सरकार ने स्टार्ट अप योजना की शुरुआत की है और इस योजना से साबित होता है कि उनकी सरकार द्वारा अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक निर्णय आर्थिक विकास के वास्ते किए जा रहे हैं। सरकार की योजना लघु एवं मझौले उद्योगों के विकास की नीति बनाई है और उसका लाभ इन उद्योगों को मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बैंकों की मजबूती के लिए भी काम किया है और उसी का परिणाम है कि देश में कार्यरत सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक मजबूत स्थिति में हैं। जन औषधि योजना तथा आयुष्मान योजना के तहत देश के जन सामान्य के हजारों रुपए बचाए गये हैं। सरकार ने देश में मोबाइल के काम को महत्व दिया है और हमारे यहां से बने मोबाइल दुनिया के विभिन्न देशों में जा रहे हैं। इस विधेयक से विकसित और समृद्ध भारत का निर्माण हो सकेगा और भारत को विकसित देश बनाया जा सकेगा। उन्होंने कांग्रेस तथा अन्य दलों पर सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि जो व्यक्ति इतिहास में जनसंहार के लिए कुख्यात है उसकी कब्र को लेकर वोटों की राजनीति की जा रही है और हत्यारे औरंगजेब की कब्र को महिमामंडित कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के देवेश शाक्य ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के किसानों को मदद देने के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए, लेकिन उसकी योजनाओं का फायदा आम आदमी को नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि सरकार ने कर में छूट 12 लाख रुपए की है, लेकिन सरकार को देश में इस दायरे में आने वाले लोगों की आय को बढाना चाहिए। सरकार को करों में आम लोगों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए। जनता की कमाई के पैसा का सरकार ही उससे उगाही कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि सरकार सिर्फ दिखावा करती है और इसी पर उसे भरोसा भी है। उनका कहना था कि अमेरिका से भारत में आने वाले सामान पर भुगतान को लेकर अमेरिका ने सबको चौंका दिया है इसलिए वित्त मंत्री को भी अपनी टैरिफ नीति बनानी चाहिए। सरकार ने आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के शासनकाल में कई तरह की दिक्कतें आईं और उनका समाधान किया गया था। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में निवेश कम आ रहा है और निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां वहां छोटी कंपनियों पर कब्जा करने में लगी हैं। माकपा के अमरा राम ने कहा कि आम आदमी को लूटने का काम सरकार द्वारा करों के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 16 लाख करोड़ रुपए का ऋण को ‘राइट ऑफ’ किया गया है। सरकार कहती है कि राइट ऑफ का मतलब माफी नहीं होती है तो वित्त मंत्री बतायें कि कितने धन की वसूली की गयी है।

कांग्रेस के डॉ. एम के विष्णुप्रसाद ने कहा कि टैक्स में छूट के अलावा कोई दूरदर्शी योजना बजट में नहीं है। भारत पर 181 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ है। इसको कैसे चुकता किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु है। लेकिन कृषि क्षेत्र को 2.67 प्रतिशत का आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नैनो उर्वरक ईजाद किया है लेकिन यह नैनो उर्वरक बुरी तरह से विफल हुआ है। उन्होंने ऋण के नियमों में बदलाव को गरीबों के हितों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को सभी राज्यों के लिए अभिभावक की तरह से काम करना चाहिए। गुजरात को रेलवे के लिए 16 हजार करोड़ रुपए दिये गये जबकि तमिलनाडु को केवल 6000 किलोमीटर दिये गये हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के तरीकों पर आपत्ति जतायी और कहा कि बलपूर्वक नीतियों को लागू कराना ठीक नहीं है।

भाजपा के सौमित्र खान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दि विकास लक्ष्य के बारे में चर्चा करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को दिशा दिखायी। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान योजना, स्वच्छ भारत योजना, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि के लिए आवंटन किया गया है। वर्ष 2014 में टैक्स जीडीपी अनुपात 6.5 प्रतिशत था जो आज 11.7 प्रतिशत है। हमने वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन और बुलेट ट्रेन चलने के बारे में कभी सोचा नहीं था। श्री खान ने दस साल में देश एवं पश्चिम बंगाल में केन्द्र सरकार के सहयोग से विकास की उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कोलकाता में स्मार्ट सिटी के लिए पैसा दिया गया है लेकिन राज्य सरकार निष्क्रिय है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार पर केन्द्र की योजनाओं को रोकने में ताकत लगा रखी है।

जनता दल यूनाइटेड के आलोक कुमार सुमन ने कहा कि बजट की सराहना की और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में कमी आयी है। सभी क्षेत्रों में मूल्य हुआ है। भारत का निर्यात एक अरब डॉलर तक बढ़ गया है। निर्यात होने वाली वस्तुओं में फार्मास्युटिकल्स, इलैक्ट्रॉनिक्स गुड्स आदि शामिल हैं। टैक्स का संग्रहण एवं वितरण एकसमान ढंग से होना चाहिए ताकि पूरे देश का एक समान विकास सुनिश्चित हो सके। देश में खाद्यान्न, दूध, मछली उत्पादन नये रिकॉर्ड कायम कर रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि नये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर आम आदमी पर विपरीत प्रभाव डालने वाले नहीं होने चाहिए।

वीसीके के थोल तिरुमावलम ने कहा कि महाबोधि मंदिर के प्रबंधन में बदलाव किया जाये। उसमें बौद्ध ही शामिल हों। वहां बौद्ध के अलावा किसी अन्य धर्म के क्रियाकलाप नहीं हो।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) के सुदामा प्रसाद ने कहा कि भ्रष्टाचार का बोलबाला है। कोई काम बिना रिश्वत के नहीं हो रहा है। पांच किलो राशन का हल्ला हो रहा है, चार किलो राशन आ रहा है। बजट का पैसा इस तरह से लूटा जा रहा है। कच्चे मकान वालों के सर्वेक्षण करके प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाये। उन्होंने कहा कि बजट गरीब जनता के खून पसीने की कमाई से आता है। इस धन की लूट को रोका जाये। उन्होंने किसानों को पहचान पत्र दिलाया जाये। ऑनलाइन व्यापार को सीमित एवं नियंत्रित किया जाये ताकि छोटे खुदरा व्यापारियों को नुकसान नहीं हो।

शिरोमणि अकाली दल हरसिमरत कौर बादल ने वित्त विधेयक का विरोध किया और कहा कि बजट में पंजाब का नाम तक नहीं आया। उन्होंने पंजाब में वित्तीय कुप्रबंधन की आलोचना की। उन्होंने भारत की विकाय यात्रा को रोज़गार विहीन यात्रा करार दिया। उन्होंने पंजाब के साइकिल उद्योग सहित देश के सभी रोज़गार परक उद्योगों को उत्पादकता लिंक बोनस (पीएलबी) का लाभ दिये जाने की मांग की। उन्होंने किसानों की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की बात नहीं करने की आलोचना की।

भाजपा के डॉ सी एन मंजुनाथ ने कहा कि सेमी कंडक्टर क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और 1.5 लाख करोड़ रुपए का इसमें निवेश किया गया है। विधेयक को करदाताओं के अनुकूल बनाया गया है। इलेक्ट्रेनिक वाहनों के लिए राज्य सरकारों से राहत दी जा रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के आम लोगों को राहत मिल रही है और गंभीर बीमारियों का भी इलाज इस योजना के तहत किया जा रहा है। कर्नाटक के लोगों के एम्स अस्पताल खोलने की मांग की थी और सरकार से उनकी मांग है कि वहां एम्स खोला जाना चाहिए।

निर्दलीय विशालदादा प्रकाशबापू ने कहा कि सरकार ने टैक्स और जीएसटी को लेकर लोगों पर जोर पड़ रहा है, लेकिन सच यह है कि उन्हें रात को नींद भी नहीं आती है। टैक्स में सरकार ने जो कर में छूट दी है वह नयी व्यवस्था के तहत है। आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार को एससी, एसटी के लिए सरकार की योजनाएं क्या हैं इस बारे में बताया जाना चाहिए।

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि वित्तीय घाटा लगातार गिरता जा रहा है, लेकिन दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन पर कुछ नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि 12 लाख रुपए तक की आय पर छूट दी गई है, लेकिन लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाएगा इस बारे में कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन जिस तरह के आर्थिक क्षेत्र में कदम उठा रहा है उसका भारत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अमेरिका ने जो व्यापार युद्ध शुरु किया है वह ठीक नहीं है और उसके कारण देश के व्यापार पर गहरा असर पड़ेगा।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि एलआईसी एजेंटों की बड़ी समस्या हो गई है और अपनी पीड़ा को लेकर उन्होंने हाल में ही दिल्ली में बड़ा सम्मेलन भी किया है। सरकार को उनकी बातों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार आईआईटी में संख्या बढ़ा रही है, लेकिन जरूरत वहां संसाधन बढाने की भी है ताकि प्रशिक्षण के लिए सभी आवश्यक सुविधा उपलब्ध हो सके। निर्दलीय पप्पू यादव ने कहा कि अस्पताल तथा स्कूलों से जुड़ी वस्तुओं पर जीएसटी हटाया जाना चाहिए। उन्होंने जीएसटी को आतंक बताया और कहा कि इसके कारण लोगों को बहुत दिक्कत हो रही है। उन्होंने एसएमएसई का मुद्दा उठाया और कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में लघु और सूक्ष्म इकाइयां बंद हुई है। उनका कहना था कि चिकित्सा के कारण सामान्य वर्ग पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है। निजी अस्पतालों को आतंक का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पर रोक लगनी चाहिए और शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए बजट में व्यवस्था की जानी चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने देश के विकास के लिए 2047 की बात को जुमला बताया और कहा कि बजट में इसके लिए कुछ नहीं किया गया है। देश की बड़ी आबादी अभी भी गरीबी में जी रही है और जो कर व्यवस्था बनाई गई है वह लोगों के शोषण के लिए है। उनका कहना था कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को दिशा देने और गिरती अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं दिये हैं। सरकार जिस तरह के कदम उठा रही है उससे अर्थव्यस्था की गंभीर स्थिति से उबरने की कम उम्मीद बन रही है क्योंकि महंगाई तेजी से बढ रही है और ईंधन के दाम कम नहीं हो रहे हैं।

भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत ने कहा है कि हर वस्तु पर जीएसटी लगाया गया है उससे आदिवासियों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में दूसरी, तीसरी कक्षाओं के बच्चे एक ही कक्ष में बैठ रहे हैं क्योंकि उनके लिए स्कूल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बजट में शिक्षा तथा स्वास्थ्य को जीएसटी से अलग रखा जाना चाहिए ताकि गरीबों को राहत मिल सके। आदिवासियों के लिए अलग से आवंटन होता रहा है लेकिन अब वह व्यवस्था नजर नहीं आती है और यदि व्यवस्था को नहीं बदला गया है तो उसमें देखा जाना चाहिए कि क्या उस योजना का सही लाभ आदिवासियों को मिल रहा है।

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