सिंगरौली: पूर्व विधायक के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के पदाधिकारियों ने एनसीएल सीएमडी से मुलाकात कर सरकारी भूमि-वन भूमि-एग्रीमेंट की भूमि पर घर बनाकर वर्षों से निवासरत लोगों को भी विस्थापित की श्रेणी में समाहित कर उन्हें भी उचित मुआवजा देने की मांग की है। एनसीएल सीएमडी ने इस मुद्दे पर इस श्रेणी के विस्थापितों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। ज्ञापन में बताया गया कि शासकीय भूमि-वन भूमि-एग्रीमेंट की भूमि पर घर बनाकर निवसरत परियोजना प्रभावित परिवारों को भी उचित प्रतिकर विस्थापन पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन लाभ दिलाए जाने व प्रमाणित बुकलेट के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की जानी चाहिए।
एनसीएल द्वारा जयंत एवं दुधीचुआ विस्तार के लिए भवनो का चल रहा सर्वेक्षण के दौरान प्रभावितो ने बताया कि कोयला खदान या नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड को छोड़कर बाकी राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे द्वारा किए गए अधिग्रहण में परसंपत्तियों पर 12 प्रतिशत अतिरिक्त वार्षिक रूप से दिया जाता है। एनसीएल द्वारा परसंपत्तियों का मूल्यांकन धारा 4 की तिथि पर किया जा रहा है। यानी 5 वर्ष पूर्व लोहा, सरिया, सीमेंट और मजदूर सब कुछ सस्ता था। धारा 4 की तिथि पर मूल्यांकन करना और 6-7 वर्ष बाद पैसा देना बिना किसी अतिरिक्त फायदे के विधि संगत नही है।
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