राजकोट मेट्रो रेल, सात अन्य अवसंरचना परियोजनाओं का पीएम गतिशक्ति के तहत निर्धारण

नयी दिल्ली, (वार्ता) प्रधानमंत्री (पीएम) गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुसार सरकार ने देश में अवसंरचना क्षेत्र की आठ और परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जिसमें राजकोट में मेट्रो रेल शुरू करने की परियोजना और तीन रेलवे तथा तथा चार राजमार्ग परियोजनाएं शामिल हैं।

वाणिज्य एवं उद्याग मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री गतिशक्ति के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव पंकज कुमार की अध्यक्षता में नेटवर्क नियोजन समूह की 89वीं बैठक में सड़क, रेल और मेट्रो रेल की आठ परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। पीएम गतिशक्ति में किसी परियोजनाओं का निर्धारण सभी संबंधित विभागों और सभी आवश्यक सूचनाओं के साथ किया जाता है ताकि क्रियान्वयन शीघ्रता से हो।

नेटवर्क नियोजन समूह की इस बैठक में जिन परियोजनाओं की समीक्षा की गयी है उनमें शहरी विकास मंत्रालय की गुजरात के राजकोट में पहली मेट्रो रेल प्रणाली के निर्माण के अलावा राजमार्ग मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 62 के मेघालय में दारुगिरि से दालू तक के 136.11 किलो मीटर के खंड को दोनों ओर खड़ंजे के साथ दो लेन का बनाने, असम में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लेन के दोहरे सुरंग मार्ग का निर्माण और कलियाबोर-नुमालीगढ़ सेक्शन के मौजूदा कैरिजवे को चार लेन तक चौड़ा और बेहतर बनाने तथा राजस्थान में जैसलमेर बाईपास लिंक रोड के साथ मेजिलार से जैसलमेर तक मार्ग को दो लेन का बनाने की परियोजना शामिल है।

इसी गतिशक्ति सिद्धांत के तहत रेलवे की जिन परियोनाओं की समीक्षा की गयी है उनमें महाराष्ट्र में बदलापुर-कर्जत रेल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण की 32.460 किलोमीटर लंबी परियोजना, ओडिशा में नेरगुंडी से कटक तक 15.99 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन का निर्माण के साथ नेरगुंडी में फ्लाईओवर के निर्माण तथा इसी राज्य में हरिदासपुर से पारादीप तक 74.09 किलोमीटर लंबी दोहरीकरण लाइन के निर्माण की परियोजना शामिल है।

राजकोट मेट्रो परियोजना का उद्देश्य गुजरात के राजकोट में भीड़भाड़ को कम करना और परिवहन का एक स्थायी तरीका प्रदान करना है। 41.11 किलोमीटर को कवर करते हुए, यह परियोजना मौजूदा शहरी बुनियादी ढांचे के साथ सहज रूप से एकीकृत होगी और क्षेत्रीय रेल, सिटी बस सेवाओं और ऑटो और साइकिल रिक्शा जैसे मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन के साथ विभिन्न प्रकार की संपर्क सुविधाओं से जुड़ी होगी।

मेघालय में दारुगिरि से दालू राजमार्ग खंड पूर्वी गारो हिल्स, दक्षिण गारो हिल्स और पश्चिम गारो हिल्स से होकर गुजरता है। रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, यह गलियारा सीमा पार व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र के नीचे चार लेन की सुरंग यात्रा के समय को 6.5 घंटे से घटाकर केवल 30 मिनट कर देगी, जिससे दूरी 240 किमी से घटकर 34 किमी रह जाएगी। जुड़वा सुरंग मार्ग तैयार होने पर अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी।

कलियाबोर-नुमालीगढ़ सेक्शन के चार लेन तक चौड़ा और बेहतर बनाने की परियोजना में नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों में 85.67 किलोमीटर की संपर्क सुविधा को बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके अलावा इस परियोजना में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता की रक्षा के लिए एक एलिवेटेड कॉरिडोर और वन्यजीव क्रॉसिंग जैसे वन्यजीव-अनुकूल उपाय शामिल किए जा रहे हैं।

राजस्थान में जैसलमेर बाईपास लिंक रोड को दो लेन का बनाने का उद्येश्य संपर्क में सुधार करना, पर्यटन को बढ़ावा देना, रक्षा आंदोलन को सुविधाजनक बनाना और सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है। राजकोट मेट्रो रेल 41.11 किलोमीटर को कवर करते हुए मौजूदा शहरी बुनियादी ढांचे के साथ सहज रूप से एकीकृत होगी।

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