आज तक नही हो सका हिरन नदी का सीमांकन

सीधी: जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर के निर्देश के महीनों बाद भी आज तक हिरन नदी का सीमांकन नहीं हो सका। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब अतिक्रमण के चपेट में घिरी हिरन नदी का सीमांकन होगा?मालूम रहे कि शहर के बाजार क्षेत्र से प्रवाहित हिरन नदी का वजूद ही अतिक्रमण के चलते खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। नदी से नाला और नाले से नाली में यह पुरानी नदी परिवर्तित हो गई है। कहने के लिये तो गर्मी के दिनों में हर वर्ष जल संवर्धन अभियान चलाया जाता है।

उस दौरान हिरन नदी को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिये भी बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं बाद में अभियान समाप्त होते ही हिरन नदी को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्यवाई शुरू करने की बजाय हीला-हवाली में लटका दिया जाता है। हिरन नदी को उसके वास्तविक स्वरूप में पहुंचाने के लिये सीमांकन की कार्यवाई पहली जरूरत है। सीमांकन की कार्यवाई यदि राजस्व विभाग द्वारा पूर्ण कर लिया जाता है तो हिरन नदी के क्षेत्रफल का वास्तविक निर्धारण हो जायेगा, उसके बाद जो अतिक्रमण चिन्हित किये जाएं उनको हटाने की कार्यवाई शुरू होनी चाहिये।
नवभारत द्वारा हिरन नदी बचाओ मुहिम पिछले वर्ष से चलाया जा रहा है। मुहिम के दौरान हिरन नदी को बचाने के लिये जनप्रतिनिधि, व्यवसायी, गणमान्य नागरिक गंभीर रहे हैं। सभी की अपेक्षा है कि हिरन नदी को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त किया जाए जिससे वह अपने पुराने वास्तविक आकार में लौट सके। बाजार क्षेत्र के मध्य से प्रवाहित हिरन नदी की काफी उपयोगिता मानी जा रही है। अतिक्रमणकारियों द्वारा अपने स्वार्थ के चलते नदी के अस्तित्व को ही पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है। नदी का जो स्वरूप वर्तमान में दिखाई दे रहा है उससे स्पष्ट है कि नदी के ऊपर ही निर्माण कराने की होड़ मची है।

हिरन नदी में नहीं थम रहा अतिक्रमण का सिलसिला
हिरन नदी को पाट कर निर्माण कराने की होड़ करीब तीन दशक से मची हुई है। स्थिति यह है कि कुछ लोग हिरन नदी के तट को भी बेंच और खरीद रहे हैं। इसके बाद नदी के तट पर बड़े-बड़े निर्माण कराये जा रहे हैं। रसूखदार अतिक्रमणकारियों पर कार्यवाई की मांग लम्बे अर्से से हो रही है। विडम्बना यह है कि जिला प्रशासन को इस पर कार्यवाई सुनिश्चित करानी है। पिछले वर्ष सीमांकन के लिये दल का गठन भी किया गया था। बाद में बरसात का समय बताकर मामले को लटका दिया गया। हिरन नदी में भारी अतिक्रमण को लेकर शहरवासी जहां मुखर होकर विरोध कर रहे हैं वहीं जिनको कार्यवाई करनी है वह कहीं न कहीं बेबस और लाचार बने हुये हैं।

इधर,हिरन नदी के दोनो तटों पर भारी अतिक्रमण की जानकारी पिछले वर्ष सामने आने पर कलेक्टर द्वारा सीमांकन के लिये टीम गठित कर दी गई थी। टीम में राजस्व विभाग के साथ नगर पालिका शामिल थी। टीम गठित करने की मुख्य मंशा यह थी कि हिरन नदी का क्षेत्रफल सीमांकन के दौरान पुराने नक्शे के अनुसार चिन्हित हो सके। हिरन नदी का क्षेत्रफल चिन्हित होने पर यह स्पष्ट हो जायेगा कि उसके कितने क्षेत्रफल में अतिक्रमण किया गया है। इसके बाद अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार हो और उन्हें हटाने की कार्यवाई बढ़े। पिछले वर्ष टीम गठित होन के बाद भी आखिर किसके दबाव में हिरन नदी का सीमांकन नहीं हो रहा है ।
इनका कहना है
हिरन नदी के सीमांकन के लिए गठित दल से रिपोर्ट मांग कर रिपोर्ट के आधार पर हिरन नदी में जो भी अतिक्रमण होगा उसमें कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
जान्हवी शुक्ला, तहसीलदार गोपद बनास
हिरन नदी के सीमांकन के लिए नगर पालिका परिषद सीधी द्वारा भी तहसीलदार गोपद बनास को पत्र लिखा गया है।
श्रीमती मिनी अग्रवाल, सीएमओ नपा सीधी

Next Post

शिक्षक पर पलटा गिट्टी से भरा ट्रैक्टर, मौत

Sun Mar 2 , 2025
उमरिया: जिंदगी और मौत का कोई भरोसा नहीं है, वह कभी भी, कहीं भी आ सकती है। इसका सबूत एक बार पुन: नगर के विकटगंज मे देखने को मिला। शनिवार की शाम शिक्षक पुरूषोत्तम बर्मन अपने घर के बाहर आने वाली मुसीबत से पूरी तरह बेखबर खड़े थे, तभी एक […]

You May Like