ग्वालियर: डीआरडीई, ग्वालियर के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचालित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (एकाडा) ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान आवश्यक है। रासायनिक हमले की पहचान करने में एकाडा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को अमेरिका व जर्मनी से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी घटक इस्तेमाल हुए हैं। एकाडा विषैली गैसों और विषैले औद्योगिक रसायनों की ऑन-साइट पहचान करने में सक्षम है। एकाडा प्रणाली में पर्यावरण से हवा का सैंपल लेकर रासायनिक युद्धक अभिकारकों का पता लगाया जाता है। ग्वालियर के साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम ने रक्षा मंत्री को डिवाइस की बारीकियां समझाई।
