
हाईकोर्ट का अहम फैसला
जबलपुर। नीमच में पदस्थ महिला न्यायाधीश ने वेतन व वरिष्ठता का लाभ दिये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनुसूचित जाति वर्ग में गलत व्यक्तियों का चयन किया गया था। इसमें महिला न्यायाधीश की कोई गलती नहीं थी। युगलपीठ ने महिला न्यायाधीश को बकाया वेतन का 50 प्रतिशत का भुगतान करने के साथ वरिष्ठता के साथ सभी परिणामी लाभों को प्रदान करने के आदेश जारी किये है।
वर्तमान में नीमच न्यायालय में पदस्थ सिविल जज की तरफ से साल 2013 में उक्त याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि सिविल जज वर्ग के लिए 2007 में घोषित प्रतिक्षा सूची में उसका प्रतिक्षा पहला स्थान था। वह अनुसूचित वर्ग की उम्मीदवार थी। अनुसूचित वर्ग की सूची में दूसरे वर्ग के दो व्यक्तियों का चयन किया गया था। साल 2009 में उन दोनों व्यक्तियों का चयन निरस्त करते हुए उन्हें नियुक्ति प्रदान की गयी थी। नियुक्ति प्रदान करने के बाद उन्हें वरिष्ठता व वेतन का लाभ नहीं किया गया है।
युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए आदेश में कहा है कि यह निर्विवाद है कि दो अभ्यर्थी रामसुजन वर्मा और रामानुज सोंधिया अनुसूचित जनजाति वर्ग के नहीं होने के बावजूद चयनित हुए थे। याचिकाकर्ता जो पद के लिए सही रूप से पात्र थी, उनका चयन नहीं हुआ था। गलत व्यक्तियों का चयन किया गया, जिन्हें बाद में हटा दिया गया। इसमें याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं थी। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को बकाया वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान संशोधित वरिष्ठता सूची जारी करने का भी निर्देश दिया है। युगलपीठ ने 50 प्रतिशत वेतन का भुगतान चार सप्ताह में करने के आदेश दिये है।
