सिंगरौली : जिले में दिसम्बर की शुरुआत के साथ ही ठंड का असर तेजी से बढ़ने लगा है। बीते कुछ दिनों से न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे सुबह और रात के समय कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में शीतलहर जैसी स्थिति बनने लगी है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन पर दिखाई दे रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले तीन दिनों में जिले का न्यूनतम तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है, वहीं अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय हल्का कोहरा और सर्द हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। शाम ढलते ही ठंड का असर तेज हो जाता है, जिससे लोग जल्दी घरों में दुबकने को मजबूर हैं। ठंड बढ़ने के कारण सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है। सुबह-सुबह काम पर निकलने वाले मजदूर अलाव का सहारा लेते नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चौपालों और बाजारों में जगह-जगह अलाव जलाए जा रहे हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में भी लोग गर्म कपड़ों, स्वेटर, जैकेट और शॉल का उपयोग करने लगे हैं।
ठंड के चलते स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। जिला अस्पताल एवं निजी क्लीनिकों में सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनना, गर्म पानी का सेवन करना और सुबह-शाम ठंडी हवा से बचना जरूरी है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।ठंड का असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर भी पड़ा है। कई अभिभावक छोटे बच्चों को सुबह ठंड के कारण स्कूल भेजने में असमर्थता जता रहे हैं। वहीं बाजारों में गर्म कपड़ों और कंबलों की मांग बढ़ने लगी है, जिससे व्यापारियों में हल्की रौनक भी देखने को मिल रही है।
मजदूर वर्गो के लिए ठण्ड बनी मुसीबत
सिंगरौली जिले के ग्रामीण अंचलों में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। रात और सुबह के समय तापमान तेजी से गिरने से लोग ठिठुरने को मजबूर हैं। गरीब और मजदूर वर्ग के लिए ठंड सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। कई गांवों में लोग अलाव जलाकर रात गुजार रहे हैं। बुजुर्गों और बच्चों पर ठंड का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, वहीं सर्दी-खांसी और बुखार के मरीज बढ़ने लगे हैं। ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होने से ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
