नयी दिल्ली (वार्ता) कैम्ब्रिज बिजनेस स्कूल में इनोवेशन हब का नेतृत्व करने वाले प्रो. कार्लोस मोंटेस ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के साथ भारत की डिजिटल क्रांति को गुरुवार को यहां प्रत्यक्ष रूप से देखा।
उन्होंने कहा कि यूपीआई प्रौद्योगिकी को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर केंद्रित है। यह सुनिश्चित करना कि इसका उपयोग भारत में कोई भी नागरिक कर सके। श्री मोंटेस को पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर लेन-देन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई और बताया गया कि कैसे यूपीआई ने वैश्विक भुगतान को बदल दिया, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया और सुरक्षित, तेज़ लेन-देन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि यूपीआई अन्य देशों को भारतीय अनुभव से सीखने का अवसर प्रदान करता है। उन्हें बताया गया कि जनवरी, 2025 के महीने में यूपीआई लेनदेन 16.99 अरब को पार कर गया और इसका मूल्य ₹23.48 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया, जो किसी भी महीने में दर्ज की गई सबसे अधिक संख्या है।श्री मोंटेस, जो कल भारत मंडपम में एनएक्सटी कार्यक्रम में भाग लेने और बोलने के लिए भारत के दौरे पर हैं, को आज यूपीआई प्रणाली के कामकाज और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई।
श्री मोंटेस को यूपीआईं के कामकाज, सफलता और रुझानों के बारे में वित्तीय सेवा विभाग और एनसीपीआई टीम द्वारा यूपीआई पर एक प्रस्तुति दी गई। श्री मोंटेस ने कहा कि एकीकृत भुगतान इंटरफेस अन्य देशों को भारतीय अनुभव से सीखने और अपने देशों में इसे अपनाने के तरीके के बारे में विचार प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। प्रदर्शन के बाद श्री मोंटेस ने कहा कि उन्हें यूपी आई भुगतान प्रणाली की सफलता देखकर खुशी हुई।
प्रो. मोंटेस ने कहा कि इससे पता चलता है कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उनके द्वारा विकसित की जाने वाली तकनीक नागरिकों के लिए उपयोगकर्ता के अनुकूल हो। उन्होंने आगे कहा कि इसमें अन्य देशों के लिए भी अनुभव से सीखने और अपने देशों में इसे अपनाने के तरीके के बारे में विचार प्राप्त करने की क्षमता है।
