श्रीनगर 24 फरवरी (वार्ता) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे के तहत लोगों के सभी मुद्दों का समाधान संभव नहीं है।
श्री अब्दुल्ला ने यह बात संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कही कि लोग शिकायत कर रहे हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में जो वादे किए थे, वे जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं।उन्होंने कहा , “हमने पहले दिन से ही कहा है कि केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे के तहत हम जो कुछ भी कर सकते हैं, वह करेंगे। घोषणापत्र सिर्फ पांच दिन या पांच सप्ताह के लिए नहीं था। यह पांच साल के लिए था। हमने अभी तक विधानसभा में अपना पहला बजट पेश नहीं किया है। आप इंतजार करें..हम जानते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से क्या वादे किए हैं और हम उन्हें कैसे पूरा करेंगे।”
उन्होंने कहा , “मैं राज्य के दर्जे के लिए इतना संघर्ष क्यों कर रहा हूं? मैं राज्य के दर्जे की बहाली के लिए बार-बार क्यों दबाव बना रहा हूं? जैसा कि मैं जानता हूं कि ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनसे लोग परेशान हैं। लेकिन केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे के तहत उनका समाधान संभव नहीं है। इसके लिए राज्य का दर्जा वापस मिलना जरूरी है। हम दोनों काम एक साथ करेंगे। केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे के तहत हम जो कुछ कर सकते थे, वह करेंगे और जो काम राज्य का दर्जा मिलने के बाद ही संभव हैं, उन पर भी जोर दिया जायेगा।”
केंद्रशासित प्रदेश के दर्जे के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पेश किए जाने वाले बजट के बारे में पूछे जाने पर सवाल को उन्होंने टाल दिया। उन्होंने कहा, “ आगामी 07 मार्च को विधानसभा में बजट पेश किये जाने से पहले इसके बारे में बात करना बड़ी गलती होगी। बजट सरकार का होता है और इसे पहले विधानसभा में पेश करना सरकार का कर्तव्य है और मैं इस बारे में कुछ नहीं कहने जा रहा हूं।” मौजूदा मौसम में कम बारिश और किसानों की आशंकाओं के बारे में उमर ने कहा, “मैं किसानों की आशंकाओं से वाकिफ हूं। जम्मू-कश्मीर में सर्दियों के महीनों में 80 प्रतिशत से भी कम बारिश और हिमपात हुआ है। ऐसे कई इलाके हैं जहां खेती 70 से 80 प्रतिशत बारिश पर निर्भर है। अगर सर्दियों में बारिश और हिमपात कम होगा , तो इससे गर्मियों के महीनों में निश्चित रूप से पानी की कमी होगी।”
उन्होंने कहा कि किसानों के लिए किये जाने वाले संभावित उपायों पर कृषि विभाग और जल शक्ति विभाग से परामर्श करने के बाद विचार किया जायेगा।
