डीटीएच सेवाओं के लिए एजीआर को तीन वर्ष में कम कर शून्य करने की सिफारिश

नयी दिल्ली 21 फरवरी (वार्ता) भारतीय दूरसंचार विनियमाक प्राधिकरण (ट्राई) ने डीटीएच सेवाओं के लिए आथराईजेशन शुल्क के वर्तमान के एजीआर के आठ प्रतिशत से कम कर तीन प्रतिशत करने और तीन वर्षाें में कम करके इसको शून्य करने की सिफारिश की है।
ट्राई ने आज ‘दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत प्रसारण सेवाओं के प्रावधानों हेतु सेवाप्राधिकारों के फ्रेमवर्क’पर अनुशंसाएं जारी की हैं। मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार विभिन्न प्रसारण सेवाओं के लिए, टेलीविजन चैनल अपलिंकिंग/डाउनलिंकिंग (टेलीपोर्ट सहित), एसएनजी/डीएसएनजी, डीटीएच, एचआईटीएस, आईपीटीवी, एफएम रेडियो और सामुदायिक(कम्युणनिटी) रेडियो स्टेशन (सीआरएस) जैसी प्रसारण सेवाओं के प्रावधान के लिए भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 की धारा 4 के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) द्वारा लाइसेंस/अनुमति पत्र/पंजीकरणपत्र जारी किए जाते हैं।
इसमें ट्राई ने कहा कि रेडियो प्रसारण सेवाओं के लिए आथराईजेशन शुल्क (पूर्ववर्ती वार्षिक शुल्क) वर्तमान के एजीआर का 4 प्रतिशत या एनओटीईएफ का 2.5 प्रतिशत,जो भी अधिक हो के स्थान पर सभी शहरों के लिए एजीआर का 4 प्रतिशत की सिफारिश की है। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और द्वीप क्षेत्रों के लिए 2 प्रतिशत या एनओटीईएफ का 1.25 प्रतिशत के वर्तमान के स्थान पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और द्वीप क्षेत्रों के लिए एजीआर का 2 प्रतिशत (शुरुआती 3वर्षों के लिए, उसके बाद चार प्रतिशत करने की सिफारिश की है।
सिफारिशों में भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 की धारा 4 के तहत लाइसेंस/अनुमति जारी करने की मौजूदा प्रथा के स्थान पर, दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ए) के तहत प्रसारण सेवा प्राधिकार दिये जाएंगे। सर्विस ऑथराईजेशन के लिए नियम और शर्तों को दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 56 के तहत नियमों के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।
इसमें कहा गया है कि धारा 3(1)(ए) के तहत सेवा प्राधिकार का अनुदान प्राधिकार दस्तावेज़ के रूप में होनी चाहिए, जिसमें सेवा से संबंधित आवश्यक विवरण शामिल हों। प्राधिकार दस्तावेज़ का प्रारूप भी अनुशंसित किया गया है। “सेवा प्राधिकार प्रदान करने के लिए नियम और शर्तों” को समान सेवाओं के लिए सामंजस्य स्थापित किया गया है और उसमें पात्रता मानदंड, आवेदन की प्रक्रिया और सेवा प्राधिकार के लिए आवेदन करने से पहले आवेदक इकाई द्वारा अपेक्षित अन्य प्रासंगिक विवरण/सूचना दिया जाना शामिल किया गया है।
सिफारिशों में कहा गया है कि मौजूदा लाइसेंसधारी/अनुमति धारक के लिए उनके लाइसेंस/अनुमति की समाप्ति तक नई ऑथराईजेशन व्यवस्था में स्थानांतरण (माईग्रेशन) स्वैच्छिक होगा। इसके अलावा, प्रसारण सेवाओं के मामले में स्थानांतरण के लिए कोई प्रसंस्करण शुल्क या प्रवेश शुल्क नहीं होगा। हालाँकि, संबंधित सर्विस आथराईजेशन की वैधता अवधि मौजूदा लाइसेंस/अनुमति की वैधता अवधि से परे, आथराईजेशन व्यवस्था में स्थानांतरण की तिथि से प्रभावी होगी । प्राधिकरण की पूर्व अनुशंसाओं के आधार पर नई सेवाओं को शामिल करना, अर्थात् ‘टेलीविजन चैनल का ग्राउंड-आधारित प्रसारण’ और ‘कम पावर वाली छोटी रेंज की रेडियो सेवा’।
इसमें कहा गया है कि सेवा प्रावधान के लिए नियम और शर्तों में दो भाग शामिल हैं – सभी प्रसारण सेवा ऑथराईजेशन पर लागू ‘सामान्य नियम और शर्तें’ और सर्विस स्‍पेसिफिक ऑथराईजेशन पर लागू ‘विशिष्ट नियम और शर्तें’। सेवा प्रदाताओं के हितों की रक्षा के लिए यह संस्‍तुति की गई है कि सर्विस ऑथराईजेशन की शर्तों और नियमों में संशोधन (राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों को छोड़कर) करने के लिए ट्राई की अनुशंसाओं की आवश्यकता होगी।
इसमें कहा गया है कि रेडियो प्रसारण सेवाएं देनी वाली अधिकृत इकाईयों के लिए मेंडेटरी को-लोकेशन को हटा दिया जाना चाहिए। जहां भी तकनीकी और व्यावसायिक रूप से संभव हो, स्वैच्छिक आधार पर प्रसारण सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ दूरसंचार सेवा प्रदाताओं/बुनियादी ढांचा प्रदाताओं के बीच बुनियादी ढांचे को शेयर करने की संस्‍तुति की गई है। ‘टेलीविजन चैनल वितरण सेवाओं’ की अधिकृत संस्थाएं उपभोक्ताओं के लिए विकल्प बढ़ाने और इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट (वेस्‍ट) को कम करने के लिए अंतर-संचालनीय (इंटरओपेरेबल) एसटीबी को अपनाने का प्रयास करेंगी। टीईसी अंतर-संचालनीय (इंटरओपेरेबल) एसटीबी और इनबिल्ट एसटीबी कार्यक्षमता वाले टेलीविजन सेटों के लिए मानक तैयार करेगा और उन्‍हे अधिसूचित करेगा।
इसके अनुसार आईपीटीवी सेवा प्रदान करने हेतु इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के लिए 100 करोड़ रुपये की नेटवर्थ की शर्त को हटाने की संस्‍तुति की गई है और इसे दूरसंचार विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले इंटरनेट सेवाओं के ऑथराईजेशन में निहित प्रावधानों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। रेडियो प्रसारण सेवा के लिए नियम और शर्तों को प्रौद्योगिकी से स्वतंत्र (एग्‍नोस्टिक) बनाया गया है ताकि डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाया जा सके। स्थलीय (टेरेस्ट्रियल) रेडियो सर्विस के लिए सर्विस ऑथराईजेशन को आवृत्ति का निर्धारण से अलग किया जाएगा और टेरेस्ट्रियल रेडियो सर्विस के लिए आवृत्ति निर्धारण हेतु स्पेक्ट्रम की नीलामी अलग से की जाएगी।
सिफारिशों में कहा गया है रेडियो चैनल/चैनलों के प्रसारण के अतिरिक्त, टेरेस्ट्रियल रेडियो सर्विस के लिए अधिकृत इकाईयों को इंटरनेट के माध्यम से उसी कंटेंट को स्ट्रीम करने की अनुमति दी जानी चाहिए और इसमें उपयोगकर्ता का कोई नियंत्रण नहीं होगा।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय को रेडियो ब्रोडकास्टिंग सर्विस प्रोवाईडर्स के लिए अलग प्रोग्राम कोड और एडवर्टाइजमेंट कोड निर्धारित करना चाहिए। विभिन्न प्रसारण सेवाओं, विशेष रूप से ‘टेलीविजन चैनल वितरण सेवाओं’ के लिए शुल्क और प्रभार सहित नियम और शर्तों को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप बनाया गया है।

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