
सरकार की तरफ से पेश किया गया हलफनामा
जबलपुर। भोपाल गैस त्रासदी से पीड़ित व्यक्तियों के मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण कार्य के लिए अतिरिक्त मशीनें लगाई गई है। प्रतिदिन 20 हजार पृष्ठों का डिजिटलीकरण कार्य किया जा रहा है। लगभग 17 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण 6 माह में पूर्ण हो जायेगा। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार के हलफनामे को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 22 फरवरी को निर्धारित की है।
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किये गये हलफनामा में बताया गया था कि वर्ष 2014 से पूर्व के मेडिकल रिकॉर्ड बहुत पुराने हैं, इसलिए प्रतिदिन केवल 3000 पृष्ठों को ही स्कैन किया जा सकता है। इस कार्य में अनुमानित 550 दिनों का समय लगेगा। जिस पर युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है था कि निर्धारित बिंदुओं पर कार्य पूर्ण करने के प्रति अनावेदक गंभीर नहीं है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के सचिव तथा निर्देशक बीएमएचआरसी को एक सप्ताह में संयुक्त बैठक कर डिजिटलीकरण के लिए अंतिम कार्य योजना तैयार करने निर्देश जारी किये थे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित की थी। कोर्ट के निर्देश थे कि मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी। पेश रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा केन्द्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे संबंधित याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से हलफनामा पेशकर उक्त जानकारी दी गयी। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
