
फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र जारी करने का मामला
जबलपुर। लोक सेवा केन्द्र के संचालक अंकित अग्रवाल एवं कम्प्यूटर आपरेटर अर्चना दाहिया के द्वारा बिना जांच पड़ताल के एवं बिना दायरा पंजी में दर्ज कर फर्जी तरीके से मुकेश कुमार वर्मन, सूरज सिंह कोल एवं दिलीप कुमार गोड़ के नाम से जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। फर्जी और गलत दस्तावेजों के आधार फर्जी तरीके से जारी जाति प्रमाण पत्र और महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज गायब करने के मामले में रांझी पुलिस ने लोक सेवा केन्द्र संचालक, कम्प्यूटर आपरेटर समेत पांच पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
जानकारी के अनुसार कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दण्डाधिकारी रांझी जबलपुर से सहायक ग्रेड 3 के कर्मचारी संतोष कुमार यादव के द्वारा एक जांच रिपोर्ट सौंपी जिसमें उल्लेखित है कि दायरा पंजी में उपरोक्त तीनों जांति प्रमाण पत्र में वर्णित केस नंबर दायरा पंजी में पंजीबद्ध नहीं पाया गया हैं जिससे कि संदेह की स्थिति में आगामी जांच की गई। जाँच के मूल प्रकरण की खोज की गई लेकिन मूल प्रकरण कार्यालय में उपलब्ध होना नहीं पाया गया। एसी स्तिथि में लोकसेवा केंद्र द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेज के आधार पर जाँच की गई। जांच में यह पाया गया कि प्रस्तुत ऑनलाईन आवेदन में जो पता लिखा है उस पते पर वर्तमान एवं सन् 1950 की स्थिति में अनावेदकगण, उनके पूर्वर्जी का निवास नहीं पाया गया, जोकि अनुसूचित जनजाति के संदर्भ में अनिवार्य है। मुकेश कुमार बर्मन पिता स्व. नत्थूलाल बर्मन ने अपने आवेदन में जिस समय सदस्य आई-डी. क्रमांक का लेख किया वह उक्त समय आई.डी. वास्तव में सोमवती बर्मन ग्राम पंचायत छतवई जनपद पंचायत सुहागपुर जिला शहडोल की है। साथ ही आवेदन पत्र में अनावेदक द्वारा अपलोड अंकसूची माध्यमिक शिक्षा मण्डल म.प्र. भोपाल हाई स्कूल परीक्षा वर्ष 2001 में गवर्मेन्ट रघुराज हायर सेकेण्ड्री स्कूल क्रमाक 02 शहडोल की है एवं मुकेश बर्मन द्वारा जबलपुर निवास संबंधी अन्य कोई भी दस्तावेज आवेदन पत्र में संलय नहीं किया है। शहडोल जिला से होने के कारण और जबलपुर में 1950 की स्थिति में कोई भी निवास प्रमाण नहीं होने की अवस्था में इनका जाति प्रमाण पत्र अनुविभागीय अधिकारी रांझी न्यायालय से जारी किया जाना संभव नहीं था। दिलीप कुमार पुत्र छोटे लाल ने फार्म में अपना ग्राम जय प्रकाश नगर अधारताल जबलपुर वर्णित किया है और साथ में समय परिवार आई डी क्रमांक प्रदाय की। जांच में यह पाया गया कि उक्त परिवार आई.डी. में दर्ज दिलीप कोई अन्य व्यक्ति है और महर्षि सुदर्शन वार्ड रांझी का निवासी है। गलत समग्र आईडी एवं अधिकारी क्षेत्र के बाहर होने के बावजूद उक्त प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी रांझी के न्यायालय में प्रेषित कर वहां से जारी कराया गया। सूरज सिंह पिता भीकम सिंह ने खुद को फार्म में सरस्वती स्कूल के पास पोस्ट खमरिया जबलपुर का निवासी होना बताया है एवं साथ में समग्र परिवार आई डी क्रमांक संलग्र की है। उक्त परिवार आई डी में दर्ज वास्तविक मूरज सिंह मृत व्यक्ति है। प्रस्तुत आवेदन में अंकसूची भी माध्यमिक 2014 में स्कूल गवर्मेन्ट गर्ल्स हायर सेकेण्ड्री स्कूल मेहगांव जिला भिण्ड की है। तीनों प्रकरणों में अनावेदकगणों द्वारा किसी अन्य व्यक्ति की या अपने नाम से मिलते-जुलते हुए किसी व्यक्ति का समय आइडी का उपयोग करते हुए अपना प्रकरण दर्ज करवाया है। उक्त प्रकरणों में जिन अंकसूची का प्रयोग किया गया यह अन्य जिलों की है एवं अनुसूचित जनजाति के लिए अनिवार्य 1950 की स्थिति का निवासी प्रमाण पत्र किसी के भी द्वारा संलग्न नहीं किया गया। जिससे न केवल उक्त प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी रांझी के क्षेत्र अधिकार से बाहर है वरन विधि विरुद्ध जारी किया गया। सही जानकारी छुपाकर एवं मिथ्या प्रतिरूपण करते हुए अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवाया गया है। तीनों जाति प्रमाण पत्र वर्तमान कार्यरत एसडीएम द्वारा निरस्त कर दिए गए हैं। तीनों जाति प्रमाणपत्र गलत दस्तावेज, गलत अंक तालिका एवं निवास की गलत जानकारी के आधार पर फर्जी तरीके से सुनियोजित षड्यंत्र कर प्रक्रिया से जारी किए गए है। पूरी प्रकिया में लोक सेवा केन्द के संचालक एवं उसके ऑपरेटरों, अर्चना दाहिया एवं तीनों ने आपराधिक षडयंत्र और मिलीभगत कर विधि विरुद्ध और फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनाये गये। लोकसेवा केंद्र के संचालक ऑपरेटरों और अर्चना दाहिया ने मिलकर कई और जाति प्रमाणपत्र फर्जी तरीके
जारी कर दस्तावेज को गायब नष्ट कर दिया।
