
अंतरिम आदेश : नगर निगम सहित अन्य को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
जबलपुर । सुप्रीम कोर्ट ने पुरुषार्थ हाउसिंग कोआपरेटिव सोसाइटी, जबलपुर में सभी व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह अंतरिम आदेश तब आया जब सोसायटी द्वारा अपनी आवासीय सीमा में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण के विरुद्ध दायर याचिका पर हाई कोर्ट द्वारा दिया गया अंतरिम संरक्षणात्मक आदेश बाद में निरस्त कर दिया गया था।
दरअसल, पुरुषार्थ हाउसिंग सोसायटी ने जबलपुर नगर निगम द्वारा आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण की स्वीकृति दिए जाने के विरुद्ध हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने सोसायटी के पक्ष में एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया था कि सोसायटी में कोई नया व्यावसायिक निर्माण नहीं किया जाएगा। लेकिन प्लाट नंबर 12 के मालिक द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश निरस्त कर दिया। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सोसायटी की ओर से अधिवक्ता अमित साहनी ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण पूर्ण रूप से अवैध है और नगर निगम ने नियमों का उल्लंघन करते हुए स्वीकृति प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी, बल्कि जबलपुर नगर निगम से यह स्पष्ट करने को कहा कि प्लाट के लिए व्यावसायिक लेआउट की स्वीकृति किस आधार पर दी गई। क्या इस स्वीकृति से पहले सोसायटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई और आवासीय सोसायटी पर हो रहे चार मंजिला व्यावसायिक निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी, 2025 को नगर निगम व अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट में इस संबंध में दायर मूल रिट याचिका अभी भी लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देते हुए व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगा दी है।
