‘शिक्षा मंदिर’ निर्माण के लिए अडानी परिवार ने दिया दो हजार करोड़ का दान

नयी दिल्ली, 17 फरवरी, (वार्ता) अडानी परिवार ने पूरे देश में विश्वस्तरीय शिक्षा और सीखने के बुनियादी ढांचे के बनाने के उद्देश्य से दो हजार करोड़ रुपये दान करने की घोषणा की है। इसके लिए अडानी फाउंडेशन ने देश भर में शिक्षा के मंदिर स्थापित करने के लिए निजी के-12 शिक्षा में वैश्विक अग्रणी जेईएमएस एजुकेशन के साथ सहयोग किया है।

फाउंडेशन ने आज यहां जारी बयान में कहा कि अडानी परिवार की ओर से 2,000 करोड़ रुपये के आरंभिक दान के साथ, यह साझेदारी समाज के सभी वर्गों के लोगों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा और सीखने के बुनियादी ढांचे को किफायती बनाने को प्राथमिकता देगी। महानगरों और टियर दो से चार शहरों में किफायती और विश्वस्तरीय स्कूल खोलने के लिए 2,000 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया है। के-12 सेगमेंट में 20 स्कूलों का आरंभिक नेटवर्क बनाने के लिए जेईएमएस एजुकेशन के साथ सहयोग किया गया है जहां वंचित और योग्य बच्चों के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत सीटें निःशुल्क होंगी।

पहला ‘अडानी जीईएमएस स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में लखनऊ में खुलेगा। अगले तीन वर्षों में, के-12 सेगमेंट में कम से कम 20 ऐसे स्कूल भारत के प्राथमिक महानगरीय शहरों में और बाद में टियर दो से चार शहरों में भी शुरू किए जाएंगे। अडानी समूह की अखिल भारतीय उपस्थिति और व्यापक बुनियादी ढाँचा क्षमताओं और जीईएमएस की शैक्षिक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए, साझेदारी पूरे भारत में छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एक स्केलेबल, किफ़ायती और टिकाऊ मॉडल विकसित करने की योजना बना रही है।

अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कहा, “यह पहल विश्व स्तरीय शिक्षा को किफ़ायती और व्यापक रूप से सुलभ बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जीईएमएस एजुकेशन के साथ अपनी साझेदारी के माध्यम से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और अभिनव डिजिटल शिक्षा को अपनाकर, हमारा लक्ष्य परिवर्तन करने वालों की अगली पीढ़ी को भारत में सामाजिक रूप से जिम्मेदार नेता बनने के लिए तैयार करना है।”

जीईएमएस एजुकेशन के संस्थापक और अध्यक्ष सनी वर्की ने कहा, “ हमारा दृष्टिकोण हमेशा से हर शिक्षार्थी को उनकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ कराना रहा है। अडानी फाउंडेशन के साथ सहयोग हमें अपनी पहुँच और प्रभाव का विस्तार करने, भारत के विविध क्षेत्रों में शिक्षार्थियों और शिक्षकों तक अपनी वैश्विक शैक्षिक विशेषज्ञता लाने के लिए मज़बूत करेगा।”

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