पूर्व घटनाओं से सबक नही लिया जिला प्रशासन, गड़ाखाड़ अग्रिकाण्ड से अब प्रशासन की टूटी नींद

जिला प्रशासन की जमकर हो रही किरकिरी, प्रशासन अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए कर रहा जोर अजमाईस

नवभारत न्यूज

सिंगरौली 16 फरवरी। अमिलिया घाटी में पिछले दिनों सड़क हादसे मेें हुई दो युवको की अकाल मौत के बाद गड़ाखाड़ एवं अमिलिया घाटी में वाहनों के साथ तोड़फोड़ पुलिस कर्मी एवं अदाणी पावर कम्पनी के कर्मचारियों के साथ मारपीट के मामले में जिला प्रशासन की नाकामी की जगह-जगह चर्चाएं हो रही है।

गौरतलब है कि बधौरा चौकी के अमिलिया घाटी में कोल वाहन के टक्कर से मोटरसायकल सवार दो युवको की रामलल्लू यादव एवं रामसागर प्रजापति का अकाल मौत हो गई। वही हाईवा वाहन घाटी में पलट गया था। जिसके नीचे बाइक एवं दोनों युवक दब गये थे। इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने वाहनों में तोड़फोड़ करते हुये। कई हाईवा एवं अदाणी पावर परियोजना के बसों को आग के हवाले कर दिया । साथ ही उक्त परियोजना के कर्मचारियों के साथ-साथ पुलिस कर्मचारियों के साथ भी मारपीट किया। रात करीब 10 बजे तक यह ताण्डव किया। उक्त घटना के बाद खेतो में पुलिस छुपी पुलिस बाहर आई और इसके बाद पुलिस नाकामियों पर पर्दा डालने का प्रयास करने लगी है और आगे भी पुलिस आलाधिकारी इसी तरह प्रयास कर भी रहे है। ताकि पुलिस पर आरोप न लगे। इसके लिए दूसरों पर आरोप थोपने की तैयारी की जा रही है। हालांकि यह जन चर्चा है और लोगबाग भी तहर-तरह की चर्चाएं करने लगे है। इसी बीच यह भी चर्चाएं आने लगी है कि जिले में वर्ष 2008 से लेकर 16-17 के बीच हुई बड़ी घटनाओं से जिले के पुलिस अधिकारी अतीत मानकर भूल गये। पूर्व की घटनाओं से सबक लिया होता तो गड़ाखाड़-अमिलिया घाटी के आगजनी एवं मारपीट तथा तोड़फोड़ जैसी घटनाओं को रोका जा सकता था। परन्तु आलाधिकारी पूर्व की घटनाओं पर कभी जानकारों से चर्चा करना ही उचित नही समझा। माना जा रहा है कि इसी का परिणाम है कि चंद्र घण्टो में ही बड़ी वारदात हो गई। फिलहाल गड़ाखाड़ अग्रिकाण्ड के मामले मेें पुलिस एवं प्रशासन की नाकामियों की चर्चाए तरह-तरह की जा रही है।

बधौरा, कचनी, बिलौंजी एवं गोनर्रा काण्ड को लोग नही भूले

एस्सार पावर कम्पनी के स्थापना के दौरान जमकर बवाल तोड़फोड़, मारपीट, आगजनी घटनाएं हुई थी। इसके कुछ महीनों बाद बैढ़न कचनी मेंं बवाल हुआ। यहा भी आरोप लगे थे किे पुलिस की गलत रवैया से विवाद हुआ। वही कुछ वर्षो बाद वर्ष 2014 के नवम्बर माह के दूसरे सप्ताह में बिलौंजी काण्ड पूरे प्रदेश में चर्चा बन गया था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जयदेवन एवं कोतवाली बैढ़न के टीआई की राजपूत के नादानी के चलते बैढ़न इलाका 5 दिनो तक कफर््यू के साये में रहा । इसके ठीक 1 साल बाद गोनर्रा में 4 दिनों तक कफर््यू लगा था। जिले में इसके अलावा अन्य कई बड़ी घटनाएं हुई और उस वक्त माना जा रहा था कि पुलिस गलत रवैया रहा। इन सब घटनाओं से मौजूदा कलेक्टर, एसपी ने गंभीरता से नही लिये। वही उक्त गड़ाखाड़ अग्निकाण्ड से प्रशासन की नाकामी पर खूब चर्चा चली है।

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