फर्जी तरीके से पास करने वाले ही को बचा रहा विभाग
जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में फर्जी तरीके से एंट्रेंस एग्जाम पास करने का मामला में विभाग द्वारा ही उस व्यक्ति को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच टीम द्वारा विगत दिनों फर्जी तरीके से पास करने वाले व्यक्ति की उत्तर पुस्तिका भी मांगी है थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लेकिन तय समय के बावजूद भी विभाग द्वारा उत्तर पुस्तिकाएं जांच समिति को अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिसके लिए यह बात सामने आ रही है कि विभाग ही उस व्यक्ति को बचाने के लिए लगा हुआ है। उल्लेखनीय है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आर्थिक अनियमितता की शिकायत और उत्तर पुस्तिका में फर्जी तरीके से पास करने की शिकायत को लेकर जांच टीम विश्वविद्यालय पहुंची थी। जिसके लिए जांच दल ने विगत दिनों विश्वविद्यालय में पहुंचकर संबंधित विभाग से बयान लिए थे, इसके बाद कुछ दस्तावेज भी टीम द्वारा मांगे गए। जिनको लेकर टीम रवाना हो गई थी। उसके बाद फिर जांच समिति ने फर्जी तरीके से पास करने वाले व्यक्ति की उत्तर पुस्तिका मांगी थी, लेकिन एक हफ्ते बीत जाने के बाद भी जांच समिति को उत्तर पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई।
अभी भी पदस्थ है व्यक्ति
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रादुविवि में दीपेश मिश्रा नामक व्यक्ति को पीएचडी के एंट्रेंस एग्जाम में पास कर दिया गया था, उक्त व्यक्ति वर्तमान में छात्रावास पर भी पदस्थ है और गेस्ट फैकल्टी के रूप में कम्प्यूटर विभाग में भी सेवा दे रहा है। जिसकी शिकायत सामने आने के बाद अब जांच टीम ने पहुंचकर जांच की थी।
जांच समिति ही लेगी अब एक्शन
रादुविवि में जांच करने के बाद 3 फरवरी को दीपेश की उतर पुस्तिका मांगी थी, लेकिन अभी तक उनको उत्तर पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराए जाने पर अब जांच समिति स्वयं ही एक्शन ले सकता है, और शासन को भी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध ना कराने पर इसकी जानकारी प्रेषित करेगा। जिसमें आदेश ना मानने वाले और व्यक्ति को बचाने में शामिल लोगों के ऊपर भी जांच के बाद कार्यवाही हो सकती है।
पांच सदस्यीय टीम ने की थी जांच
जानकारी के अनुसार इस जांच के लिए रीवा के एडी आरपी सिंह को दोबारा से विश्वविद्यालय की कमान सौंपी गई थी, जो अपनी 5 सदस्यीय टीम के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे थे और उन्होंने शिकायत कर्ता और संबंधित विभाग के कर्मचारी से बयान लिए, साथ ही संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे थे।
