सर्राफा कारोबारी ग्वालियर से बाहर माल ले जाते समय माल का पर्चेज बिल एवं डिलेवरी चालान साथ लेकर चलें.

ग्वालियर:म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री में जीएसटी पर महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन “सर्राफा कारोबारियों के लिए विक्रय हेतु ग्वालियर से माल बाहर ले जाने पर क्या कागजात साथ रखे जायें” विषय पर किया गया| बैठक में अपर आयुक्त, राज्य कर, म.प्र. संभाग-1-श्रीमती मिक्की अग्रवाल, जीएसटी विशेषज्ञ सी.ए. दीपक वाजपेयी, उपायुक्तद्बय- कुमार अभिषेक एवं राजेश धाकड़ सहित काफी संख्या में सर्राफा कारोबारी उपस्थित रहे।चेम्बर अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि व्यापारी घर से माल लेकर व्यापार करने के लिये दस-पंद्रह दिन के लिये निकलता है। व्यापारी की गाड़ी डिटेन करने से पहले यह देखना चाहिए कि व्यापारी की भावना क्या है, यदि व्यापारी की भावना चोरी की नहीं है तो उसकी गाड़ी डिटेन नहीं करना चाहिये। व्यापारी को भी अपने साथ सभी जरूरी कागज़ात लेकर चलना चाहिए लेकिन वे कागज कौन से होंगे वह हम जानेंगे।

अपर आयुक्त, राज्य कर, म.प्र. संभाग-1-श्रीमती मिक्की अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री से परिवार का रिश्ता है| वह इसलिए कि हमें उनसे व्यापारिक समस्याओं पर निरंतर फीडबैक मिलता है, जिससे हम उन मुद्दों को सॉल्व कर पाते हैं। वह हमारी कमियां भी बिना शिकायत के बताते हैं और हम उन्हें कारोबारियों द्बारा की जाने वाली त्रुटियों को बताकर उन्हें सुधारने के लिए कहते हैं। यह जो संवाद की प्रक्रिया है वह एक परिवार की तरह है| वहीं सर्राफा कारोबारी चूंकि मेरे स्वजन भी हैं इसलिए सर्राफा कारोबारी भी हमारा परिवार ही हैं, उनकी समस्याओं को जानने के लिए हम उत्सुक रहते हैं ताकि उन्हें दूर किया जा सके।

उपायुक्त राजेश धाकड़ ने बैठक में ग्वालियर से बाहर माल ले जाने पर क्या सावधानियां और क्या कागजात रखे जाने के विषय पर बताते हुए कहा कि जीएसटी की जो बेसिक प्रावधान हैं, उसमें यह स्पष्ट किया गया है| किसी भी गुड्स को फिर चाहे वह सोना-चांदी या कोई मूल्यवान धातु है, उसे ले जाने का पूरा प्रोसेस सेक्शन 138 में बताया गया है। आपके पास इनवॉइस या बिल या डिलेवरी चालान होना चाहिए| इसके साथ ही ई-वे बिल की पात्रता जीएसटी प्रावधान में है। अगर हमारे माल का ट्रांजेक्शन एक राज्य से दूसरे राज्य में होना है और हमारे माल की कीमत 50 हजार या उससे ज्यादा तो ई-वे बिल बनाना होगा| इससे कम की राशि या टैक्सफ्री वस्तुओं पर ई-वे बिल नहीं बनाना है।

मध्यप्रदेश के नोटिफिकेशन की बात करें तो सबसे लेटेस्ट नोटिफिकेशन 29.03.2022 के अनुसार ई-वे बिल को चार केटेगरी में बांटा गया है। यदि जिले के भीतर माल का ट्रांजेक्शन हो रहा है तो कितनी भी कीमत अथवा कितनी भी मात्रा हो, ई-वे बिल की कोई आवश्यकता नहीं है| एक जिले से दूसरे जिले में मूवमेंट पर टैक्सफ्री आयटम पर कोई ई-वे बिल नहीं है। टूबेको, पान मसाला इस प्रकार के प्रॉडक्ट पर 50 हजार या उससे ज्यादा पर ई-वे बिल बनाना होगा। इन उत्पाद के अलावा कोई केटेगरी है तो एक लाख या उससे उपर के माल पर ई-वे बिल बनाना होगा। मेडिसिन गुड्स के लिए आवश्यक नहीं है यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में होगा तो ई-वे बिल बनाना होगा|

सोना-चांदी अथवा मूल्यवान धातु के लिए 04.08.2023 को सरकार ने नोटिफिकेशन नंबर 38 निकाला है। इसमें रूल्स 138एफ एक्ट में जोड़ दिया है| इसमें प्रोविजन्स यह किया गया है गोल्ड-सिल्वर या मूल्यवान धातु पर 2 लाख से ऊपर के मूल्य का माल लेकर जाते हैं तो संबंधित राज्य अलग से नोटिफिकेशन जारी करके ई-वे बिल लागू कर सकता है| इसमें आपको केवल पार्ट-ए जिसमें माल की जानकारी होती है वह भरना दूसरा पार्ट-बी जिसमें व्हीकल की डिटेल दी जाती है वह नहीं भरना है। यह रिलेक्सेशन दिया गया है। म.प्र. में ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है| इसलिए आपको इंटरस्टेट तथा इंट्रा स्टेट दोनों में माल ले जाने पर ई-वे बिल की आवश्यकता आज की तारीख में नहीं है|

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