विलंब से क्रमोन्नति लाभ देने पर जवाब तलब

राज्य शासन व जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य को नोटिस
जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने गुरुजी से संविदा शाला शिक्षक बने याचिकाकर्ताओं को प्रथम क्रमोन्नति दो वर्ष विलंब से दिये जाने के मामले में अनावेदकों से जवाब तलब किया है। एकलपीठ ने मामले में राज्य शासन, जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा निवासी शशि कुमार माहोरए संतोष चौरे व रमेश सहित अन्य की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता वि_ल राव जुमड़े ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने वर्ष-1998 में गुरुजी के रूप में ग्राम पंचायतों के शिक्षा गारंटी केंद्रों में अध्यापन का कार्य प्रारंभ किया था।

वर्ष-2008 तक 500 रुपये प्रतिमाह के मानदेय पर कार्य करते रहे। 17 अप्रैल 2008 को मानदेय में बढ़ोत्तरी कर 2875 रुपये मासिक कर दिया गया। 19 दिसंबर 2008 को व्यापमं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले गुरुजियों को पांच अक्टूबर, 2009 से संविदा शाला शिक्षक के रूप में नियुक्ति दे दी गई। आगे चलकर सहायक अध्यापक संवर्ग के रूप में वेतनमान अभिवृद्धि की गई। जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 17 सितंबर 2008 से मानी गई। लेकिन 22 जुलाई 2024 को जिला शिक्षा अधिकारी छिंदवाड़ा ने वर्ष-2010 से संविदा पर प्रथम नियुक्ति आदेश मानकर 2022 में 12 वर्ष की सेवा गणना कर प्रथम क्रमोन्नति दी। इस वजह से दो वर्ष का नुकसान हो गया। अन्य जिलों में व्यापमं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले गुरुजियों को परीक्षा उत्तीर्ण करने की तिथि से लाभ मिला है। इसी भेदभाव के विरुद्ध याचिका दायर की गई है।

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