यूनिपोल और होर्डिंग्स पर न्यायालय ने दिखाई सख्ती

लगाई जा सकती है कॉस्ट

जबलपुर:नगर निगम ने नियमों को दरकिनार करते हुए शहर में जगह जगह हवा में झूलते हुए खतरनाक यूनिपोल लगा दिए है। जिसपर अब उच्च न्यायालय ने भी सख्ती दिखाई है। पूर्व निर्देश के बावजूद नगर निगम की ओर से न तो यूनीपोल और होर्डिंग पर जवाब पेश किया गया और न ही स्टेटस रिपोर्ट दी गई। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने नगर निगम को अंतिम अवसर देते हुए कहा कि यदि दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश नहीं किया गया तो 10 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई जाएगी। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि जब सितंबर 2024 को नोटिस प्राप्त हो गया है, तो भी अभी तक जवाब क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया।पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने शहर में लगे यूनिपोल और होर्डिंग्स के संबंध में जिला प्रशासन और निगम प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट माँगी थी। इसपर अगली सुनवाई 3 मार्च को होगी।

दायर हुई याचिका
उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में होर्डिंग्स और यूनिपोल लगाने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने बताया कि पहले यूनिपोल व होर्डिंग लगाने के नियम नहीं थे। वर्ष 2014 में हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। उसके बाद वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम बनाए गए थे।

हवा में लगे पोल
वही शहर के पॉश इलाकों में लगे यूनीपोल खतरे की घंटी बनकर हवा में लटक रहे हैं। बात करे अगर चौथे पुल में लगे यूनिपोल की तो यह 25 से 30 फीट की ऊँचाई पर लगा हुआ है जो तेज हवा चलने पर काँपने लगता है। आँधी और तूफान आने पर यूनिपोल रेलवे लाइन पर गिरकर ब्रिज को नुकसान पहुंचा सकता है। जानकारों की माने तो मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 के अनुसार यूनिपोल लगाने के पूर्व उसकी स्ट्रक्चरल जाँच कराना अनिवार्य है।

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