भूअर्जन में भी रेलवे अधिकारियों का फर्जीवाड़ा, भूमि के रकवे में की गई हेराफेरी

कलेक्टर एवं चुरहट के उपखण्ड अधिकारी से प्रभावित भूस्वामी ने की शिकायत

रामपुर नैकिन : रीवा-सीधी नवीन रेल लाइन परियोजना के लिए बाद में अधिग्रहित होने वाली भूमि के लिए रेलवे के वरिष्ट खंड अभियंता, हल्का पटवारी रेलवे एवं पटवारी द्वारा प्रभावित होने वाले किसानों को ज्यादा मुआवजा का लालच देकर सुविधा शुल्क की खुलेआम मांग की गई।जिन भू-स्वामियों द्वारा सुविधा शुल्क देना स्वीकार कर लिया गया उनके मुआवजा प्रकरण ज्यादा बना दिए गए। वहीं जिन भू-स्वामियों ने सुविधा शुल्क देने से साफतौर पर मना कर दिया, उनके मुआवजा प्रकरण में जमीन का रकवा ही मनमानी तौर पर घटा दिए गए।

ऐसा ही मामला सीधी जिले के रामपुर नैकिन तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत क्षेत्र पटेहरा का सामने आया है। प्रभावित भूस्वामी राजकुमार मिश्रा निवासी ग्राम पटेहरा ने कलेक्टर सीधी एवं चुरहट एसडीएम से की गई लिखित शिकायत में कहा है कि ग्राम पटेहरा में स्थित आराजी नंबर 760 रकवा 0.300 हेक्टे. का भू-अर्जन प्रस्ताव रेलवे द्वारा वर्ष 2021 में किया गया था। उस दौरान उन्हें भी इसकी जानकारी उस समय लगी थी जब रेलवे के वरिष्ट खंड अभियंता अमन सेठ एवं रेलवे हल्का पटवारी द्वारा उनको बताया गया कि खसरा नंबर 760 का संपूर्ण रकवा 0.300 हे. भूमि रेलवे में अधिग्रहित होने का प्रस्ताव है।

इसका मुआवजा कृषि लैण्ड में बनेगा। कृषि लैंड का मुआवजा काफी कम मिलता है। अगर चाहो तो मैं रकवा भूस्वामियों के लाभ के लिए कम दर्शा सकता हूं। जिससे वर्गफीट में ज्यादा मुआवजा मिलेगा। पीडि़त भूस्वामी राजकुमार मिश्रा का कहना है कि पूर्व में जो प्रस्ताव भू-अर्जन का रेलवे द्वारा तैयार किया गया था उसमें मेरा मकान भी फंस रहा था इसके अलावा भूमि भी फंस रही थी। अब नए भूअर्जन प्रस्ताव में मकान का कुछ अंश फंस रहा है और भूमि भी फंस रही है। लेकिन कुछ ऐसे खसरा नंबर प्रस्ताव में शामिल कर दिए गए हैं जो रेलवे से प्रभावित नहीं है। बताया गया है कि नवीन रेल परियोजना के लिए भूअर्जन का प्रथम प्रस्ताव वर्ष 2012 में तैयार किया गया था।

उसमें कई भूस्वामियों को पूर्व में भी मुआवजा मिल गया था। वरिष्ट खंड अभियंता अमन सेठ द्वारा सांठगांठ करके एलायमेंट बदलने से शासन को मुआवजा वितरण में करोड़ों की क्षति हो चुकी है। अगर खंड अभियंता पूर्व में ही दिए गए प्रस्ताव के अनुसार रेल लाइन का निर्माण करते तो पुन: भूअर्जन की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अपने निजी स्वार्थों के चलते रेल विभाग एवं प्रशासन को करोड़ों की क्षति पहुंचाने का कार्य किए हैं। भूअर्जन रकवों में केवल पटेहरा में ही 12 से 15 सौ रजिस्ट्रियां हुई हैं। जिससे शासन को बहुत क्षति पहुंचाई जा रही है।

सुविधा शुल्क न देने पर किया जा रहा परेशान
रीवा-सीधी-सिंगरौली नई रेल लाइन परियोजना का एलायमेंट खंड अभियंता अमन सेठ द्वारा प्रस्ताव के जरिए चेंज कराया गया। जिससे शासन को नया भूअर्जन करना पड़ा। जिस पर मेरी भी जमीन प्रभावित हो रही है। मेरे जमीन में पूर्व से ही मकान बना हुआ है। आराजी नंबर 760 का रकवा 0.300 हेक्टे. का प्रस्ताव दिया गया था। जिसमें संपूर्ण रकवा की मांग की गई थी। लेकिन मुझसे रेलवे के खंड अभियंता अमन सेठ एवं पटवारी द्वारा कहा गया कि तुम्हारे जमीन का मुआवजा कृषि लैंड में मिलेगा। जिसको आप घटवाकर वर्गफीट में कर सकते हैं। मेरे द्वारा पूंछा गया कि यह कैसे होता है तो अमन सेठ एवं रेलवे हल्का पटवारी द्वारा मुझसे दो लाख रुपए व्यवस्था बनाने की मांग की गई। जब मैने पैसा देने से मना कर दिया तो मुझे जमीन के मुआवजे में फंसा देने की बात की गई थी। इसीलिए मुझे परेशान किया जा रहा है।

इनका कहना है
धारा 11 के बाद धारा 19 का प्रकाशन हो चुका है। जिसकी दावा आपत्ति की समय-सीमा 4 फरवरी तक है। जिन किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या है वह दावा आपत्ति करेंगे। उनका निराकरण करके ही मुआवजा की कार्यवाही की जाएगी।
शैलेश द्विवेदी, एसडीएम चुरहट

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