छात्रावास के नौनिहाल खुद के पैसे से खरीद रहे तेल, साबुन, टूथपेस्ट

० शासकीय आदिवासी जूनियर छात्रावास सेमरिया का हाल, छात्रावासी बच्चों का हक डकार रहे अधीक्षक

नवभारत न्यूज

सीधी 31 जनवरी। जिले के आदिवासी विकास विभाग के जूनियर छात्रावास में रहने वाले नौनिहालों को खुद के पैसे से तेल, साबुन एवं टूथपेस्ट खरीदने की मजबूरी बनी हुई है। यह हाल शासकीय आदिवासी जूनियर छात्रावास सेमरिया का है। अधीक्षक बच्चों का हक डकारने में मशगूल हैं।

बताते चलें कि शिक्षा का स्तर सुधारने और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी छात्र-छात्राओं को पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन स्तर से छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है ताकि यहां रहकर छात्र-छात्राएं आसानी से पास के स्कूल पहुंचकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। सीधी जिले में भी बड़ी संख्या में आदिवासी छात्रावासों का संचालन हो रहा है लेकिन इनमें कई छात्रावास ऐसे भी हैं जहां रहने वाले छात्र-छात्राओं को पेटभर भोजन तक नहीं मिल पा रहा है। यही मनमानी शासकीय आदिवासी जूनियर छात्रावास सेमरिया की बनी हुई है। भले ही शासन स्तर से नौनिहालो को सुविधा के नाम पर हर वर्ष लाख रूपये का बजट दिया जाता है लेकिन उस बजट पर छात्रों का हित तो नही हो रहा लेकिन अधीक्षक जरूर मालामाल हो रहें हैं। इतना ही नहीं नहाने का साबुन से लेकर तेल, टूथपेस्ट आदि के साथ छात्रावासी बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की अतिरिक्त राशि डाली जाती है। विडम्बना यह है कि अधीक्षक सुरेश मिश्रा टूथपेस्ट, तेल, साबुन भी छात्रावासी बच्चों को नही दे रहे हैं। जिससे खुद के पैसे से रहवासी छात्र टूथपेस्ट, तेल एवं साबुन खरीदने को मजबूर हैं। इसी से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधीक्षक सुरेश मिश्रा इन आदिवासी नौनिहाल छात्रों के प्रति कितने संजीदा हैं। इतना ही नही अधीक्षक छात्रावास जाने से भी गुरेज करते हैं जो हप्ते मे एकाध दिन ही कभी कभार ही छात्रावास में जाते हैं। रात में सिर्फ छात्रावास के भृत्य ही रहते हैं। जबकि नियमानुसार अधीक्षक को छात्रावास में ही रहना चाहिए जो माता-पिता अपने बच्चों को अपने से दूर छात्रावास में पहुंचाया है। जब उन्हें पता चलेगा कि जिन अधीक्षक के भरोसे उन्होंने अपने बच्चों को छात्रावास में रहने, पढऩे के लिए भेजा है वे अधीक्षक तो यहां रहते ही नहीं है तो उनके मन में अपने बच्चों के प्रति असुरक्षा की भावना बन सकती है।

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एजुकेशन के शिक्षक, ट्राईवल के बने अधीक्षक

सबसे बड़ी गौर करने वाली बात तो यह है कि जो शिक्षक एजुकेशन (शिक्षा विभाग) के अंतर्गत शिक्षक है उसे ट्राईवल (जनजातीय कार्य) विभाग का अधीक्षक कैसे बना दिया गया। सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पूर्व इसी छात्रावास मे चंदरेह अधीक्षक संदीप पाण्डेय की पोस्टिंग हुई थी लेकिन 2-3 वर्ष पूर्व तत्कालीन सहायक आयुक्त द्वारा संदीप पाण्डेय को चंदरेह मे अटैच करके नियम विरुद्ध शिक्षा विभाग के सुरेश मिश्रा को अधीक्षक बना दिया गया। सुरेश अधीक्षक बनते ही अपनी मनमर्जी पर उतारू हो गए हैं। छात्रावास और छात्रावासी नौनिहालों की व्यवस्था सुधारने की बजाय अपनी निजी स्वार्थ पूरी करने मे लगे हैं।

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इनका कहना है

तेल साबुन अपने से खरीदना पड़ता है, इस साल ठंडी वाला कपड़े भी नही मिले।

अमित सिंह, छात्र 6वी

तेल साबुन नही मिलता ओढऩे भर के लिए कपड़े दिए हैं फिर भी ठंड लगता है।

शुभम सिंह, छात्र 8वी

अगर ऐसा है तो गलत है। हमारे आदिवासी समाज के बच्चों के साथ इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नही होगी। अगर अधीक्षक पर कार्यवाही नही हुई तो प्रशासन को ज्ञापन सौपकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

कनक सिंह, समाजसेवी जिला सीधी

शासन के नियमानुसार अगर छात्रावास के बच्चों को सुविधा नही मिलती होगी तो मैं सख्त कार्यवाही करूंगा। बच्चों के साथ अन्याय बर्दाश्त नही करूंगा। मैं हफ्ते के 2 दिन शनिवार और रविवार को प्रत्येक छात्रावासों तक जाकर खुद निरीक्षण भी करूंगा।

एस.एन.द्विवेदी

सहायक आयुक्त जन जातीय कार्य विभाग सीधी

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