धान उपार्जन में जमकर हुई धांधली

जबलपुर: समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए कई समितियों द्वारा फर्जी खरीदी भी की गई है, जिस पर नॉन एफएक्यू माल को भी पास कर समितियों ने जमकर पैसा कमाया है। इसके अलावा अच्छी क्वालिटी की धान को खरीद कर भी उनके द्वारा हेराफेरी कर दी है है। जिसका भुगतान तो शासन द्वारा किसानों को किया ही जाएगा, लेकिन उक्त भुगतान पर सही धान देखने को नहीं मिलेगी। जिसके कारण शासन को चूना तो लगता है, परंतु इस गड़बड़ी में शामिल समूह और समितियों के लोग मलाई खाते हैं।
मझौली में इस बार नहीं दिया ध्यान
जिले में जितने भी उपार्जन कार्य होते हैं, उस पर सर्वाधिक मझौली क्षेत्र पर खरीदी केंद्र बनाए जाते हैं। जहां पर पंजीयन भी इस वर्ष ज्यादा हुए थे और किसानों के द्वारा अधिक धान का उपार्जन भी वहां किया जाता है परंतु गौर करने वाली बात यह है कि इस वर्ष धान खरीदी में मझौली तहसील का नाम कहीं पर भी उजागर नहीं हुआ है। जिसके चलते ना ही वहां पर जांच हुई है और ना ही किसी भी प्रकार की कोई धांधली उजागर हो पाई। परंतु सर्वाधिक समितियों द्वारा मझौली क्षेत्र में ही खरीदी की जाती है,जहां पर जिला प्रशासन द्वारा ध्यान न रहने के कारण समितियों ने जमकर धांधली करते हुए धान की खरीदी की हैं।
खाद्य अधिकारी के विशेष सहयोग की सुगबुगाहट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में जबलपुर खाद्य विभाग में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मझौली तहसील के कई समूहों और समितियों को अपना विशेष सहयोग दिया गया है, जिसके चलते धान खरीदी में उन समितियों पर किसी भी प्रकार की कोई भी जांच नहीं हुई है। इसके अलावा उक्त समितियों ने धान खरीदी में धांधली की है। इसके अलावा उक्त अधिकारी की ड्यूटी के बाद कई समितियां और समूहों के लोगों द्वारा उनके घरों पर जमावड़ा देखने को मिल रहा है। जहां रात के समय समिति और समूह के जुड़े लोग उनके घर पहुंचते हैं और खरीदी के विषय में लंबी चर्चाएं चलती है।

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