इंदौर हनीट्रैप केस कोर्ट ने आरोपी महिला पर आरोप तय किए

अगली सुनवाई 8 फरवरी को

 

इंदौर. शहर के चर्चित हनीट्रैप मामले में शनिवार को विशेष अदालत ने आरोपी महिला मोनिका उर्फ सीमा पिता हीरालाल यादव पर चार्ज फ्रेम (आरोप तय) कर दिए. यह मामला 2019 में नगर निगम के तत्कालीन चीफ इंजीनियर हरभजन सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था. इस मामले में 8 आरोपियों को नामजद किया गया था.

प्राप्त जानकारी के अनुसार अजा-अजजा अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश देवेंद्र प्रसाद मिश्रा ने भादंसं की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 120 बी/385 (ब्लैकमेलिंग), 120 बी/389 (जबरन वसूली), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), और 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) के तहत आरोप तय किए. मामले की अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी. ज्ञात हो कि 2019 में हरभजन सिंह ने पलासिया पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी. उनका आरोप था कि कुछ युवतियां उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रही हैं. ब्लैकमेलिंग के दौरान उनसे 3 करोड़ रुपए की मांग की गई थी. पुलिस जांच के दौरान भोपाल और इंदौर से चार युवतियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से एक ने हरभजन सिंह के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत भी दर्ज कराई. इस शिकायत के आधार पर हरभजन पर भी मामला दर्ज हुआ और उन्हें निलंबित कर उनके मुख्यालय को रीवा स्थानांतरित कर दिया गया था.

 

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हनीट्रैप केस में कुल 8 आरोपी, 6 महिलाएं शामिल

इस मामले में 6 महिलाओं समेत 8 लोगों को आरोपी बनाया गया था. गिरफ्तार आरोपियों में आरती, मोनिका, श्वेता (पति विजय), श्वेता (पति स्वप्निल), बरखा और ड्राइवर ओमप्रकाश कोरी शामिल थे. बाद में सभी को जमानत मिल गई थी.

 

कैसे हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल

शिकायत के अनुसार, भोपाल में रहने वाली आरती पति पंकज दयाल ने 18 वर्षीय बीएससी छात्रा मोनिका से दोस्ती करवाई. इंदौर के एक होटल में आरती ने दोनों का वीडियो बनाया और इसके जरिए ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी. यह सिलसिला आठ महीने तक चला. तीन बार पैसों की मांग पूरी करने के बाद, जब 50 लाख रुपए की डिमांड पूरी करने के लिए आरती और मोनिका इंदौर आईं, तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

 

हरभजन सिंह की मौत और परिवार की स्थिति

निलंबन के बाद हरभजन सिंह अपने पैतृक निवास रीवा चले गए थे. वहीं, कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई. उनके परिवार ने भी शहर छोड़ दिया और दूसरे स्थान पर जाकर बस गए. इस हाई-प्रोफाइल मामले ने ना सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. अब कोर्ट की अगली सुनवाई पर इस मामले में आगे का फैसला होगा.

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