यादव और पाटिल ने किया सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना का भूमिपूजन

यादव और पाटिल ने किया सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना का भूमिपूजन

उज्जैन, 14 जनवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज कहा कि वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ में श्रद्धालु क्षिप्रा जल से स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही राज्य में विकास के कार्य लगातार जारी रहेंगे।

डॉ. यादव ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल के साथ यहां 614.53 लाख रुपये की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का भूमिपूजन किया। डॉ यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए साढ़े 12 हजार बीघा क्षेत्र में हरिद्वार की तरह विकास कार्य किये जायेंगे। सिंहस्थ-2028 साधु-संतों के लिये भी अविस्मरणीय होने वाला है, क्योंकि इस बार सरकार ने साधु-संतों और अखाड़ों को पक्के निर्माण के लिये भू-खण्ड देने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री पाटिल ने उज्जैन को मिल रही सौगातों के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई और शुभकामनाएँ दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सिंहस्थ-2028 में वर्ष-1967 के सिंहस्थ के बाद श्रद्धालुओं को मोक्षदायनी माँ क्षिप्रा के पवित्र जल में स्नान करने का पुण्य लाभ मिलेगा। क्षिप्रा नदी में पानी की कमी के चलते 1980 के सिंहस्थ में गंभीर का पानी लाया गया। इसी प्रकार 1992 और 2004 के सिंहस्थ में भी गंभीर का पानी क्षिप्रा में प्रवाहित किया गया। वर्ष-2016 के सिंहस्थ में मां नर्मदा का पानी क्षिप्रा में लाया गया। कुछ साधु-संतों का ऐसा कहना था कि जब हमें नर्मदा में ही स्नान करना था, तो हम ओंकारेश्वर में ही स्नान कर सकते थे। हमने उनकी भावनाओं को समझा और संकल्प लिया कि वर्ष- 2028 के सिंहस्थ में क्षिप्रा नदी के जल में ही सबको स्नान कराया जाएगा। बाबा महाकाल के आशीर्वाद से सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी और कान्ह क्लोज डक्ट परियोजनाओं से यह संकल्प पूरा होने जा रहा है। यह उज्जैन के इतिहास में अविस्मरणीय दिन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी और कान्ह क्लोज डक्ट दोनों अद्भुत परियोजनाएं हैं। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के अंतर्गत वर्षा ऋतु में क्षिप्रा नदी के जल को सिलारखेड़ी जलाशय में एकत्र कर पुनः आवश्यकता अनुसार क्षिप्रा नदी में प्रवाहित कर उसे निरन्तर प्रवहमान बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कान्ह क्लोज डक्ट योजना का कार्य प्रगति पर है। इसके अंतर्गत कान्ह नदी को डायवर्ट कर 30 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन से, मार्ग में जल को स्वच्छ कर, उज्जैन शहर की सीमा से बाहर गंभीर नदी की डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। सितम्बर-2027 तक यह परियोजना पूर्ण होगी। यह पाइप लाइन जमीन में 100 फीट गहराई पर जाएगी। खेतों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा और उनमें पूर्ववत खेती होती रहेगी।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री पाटिल ने अपने संबोधन में पानी बचाने के लिए अभियान चलाने और अधिक से अधिक वर्षा का जल धरती में संग्रहण के लिए बड़ी संख्या में भू-जल पुनर्भरण संरचनाएं बनाने के लिए कहा। भू-जल पुनर्भरण संरचनाएं बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा जिलों को राशि भी दी जाती है। उन्होंने कहा कि जल है तो कल है, गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में रहना चाहिए। वर्षा जल को सहेजने के लिए जो भी उपाय होता हो उसे किया जाना चाहिए।

राज्य के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना से मोक्षदायिनी माँ क्षिप्रा में शुद्ध जल का सतत प्रवाह होगा। उन्होंने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस परियोजना से सिंचाई के क्षेत्र में क्रांति आएगी। आने वाले समय में प्रदेश में 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री श्री पाटिल ने सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना पर आधारित प्रदर्शनी और मॉडल का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री श्री पाटिल को परियोजना के बारे में विस्तार से बताया।

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