इंदौर जिले में एक-एक जिला अध्यक्ष दोनों गुटों को मिलेंगे

सियासत

भाजपा जिला अध्यक्षों की घोषणा कभी भी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार इंदौर के दो जिलों में से एक जिला कैलाश विजयवर्गीय को मिलेगा और दूसरा उनके विरोधियों को. या तो ग्रामीण जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा अपने पद पर रहेंगे या फिर कैलाश विजयवर्गीय समर्थक दीपक टीनू जैन नए नगर भाजपा अध्यक्ष होंगे. यदि चिंटू वर्मा को बरकरार रखा गया तो नगर में समझौता उम्मीदवार लाया जाएगा. यदि चिंटू वर्मा की जगह ग्रामीण में किसी और को कमान सौंपी गई तो फिर दीपक टीनू जैन की संभावना नगर भाजपा अध्यक्ष बनने की सबसे ज्यादा है. इतना तय है कि इंदौर के दोनों जिला अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सहमति से ही बनेंगे.

सूत्रों का कहना है कि दिग्गजों के हस्तक्षेप के चलते सूची उलझी हुई है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जिला अध्यक्षों की सूची में पूरी दिलचस्पी ली है. उनकी कोशिश है कि प्रभावी और मैदानी तथा युवा जिला अध्यक्षों को पद पर लाया जाए जो मध्य प्रदेश शासन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संगठन को निरंतर चलायमान रखें. प्रदेश भाजपा के सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा संगठन चुनाव के दूसरे चरण में पार्टी हाईकमान ने प्रदेश के 62 जिलों के अध्यक्षों का नाम फाइनल कर लिया है. पार्टी नेताओं के अनुसार, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की हरी झंडी के बाद सूची जारी की जा सकती है.

पिछले एक सप्ताह से जिलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर चल रही माथापच्ची के बाद जिन नामों पर सहमति बनी है, उनमें से कई रायशुमारी में आए पैनल से बाहर के हैं. सूत्रों के अनुसार, संगठन की गाइडलाइन को भी ठेंगा दिखाकर दिग्गज नेता अपने समर्थकों को जिलाध्यक्ष बनवा पाने में सफल रहे हैं. माना जा रहा है कि अब प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के प्रवास के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश भाजपा के 62 जिलों के अध्यक्ष पर केंद्रीय नेतृत्व ने सहमति बना ली.
राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री ने प्रदेश के कई नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की लेकिन अंत में दिग्गजों की जिद ही सफल रही। सभी अंचलों में दिग्गज अपने-अपने समर्थकों को बिठाने में सफल रहे.
पार्टी ने हर जिले में जिलाध्यक्ष के चुनाव से पहले आम सहमति बनाने के लिए जो रायशुमारी कराई गई थी, उससे हटकर भी नामों को फाइनल किया गया है. पार्टी ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी की आशंका के चलते ही डैमेज कंट्रोल का प्लान पहले तैयार कर लिया है. दरअसल,दो जनवरी से लगातार जिलाध्यक्षों के नामों पर मंथन किया जा रहा है. पार्टी प्रदेश के 60 संगठनात्मक जिलों में से 35 से 40 जिलों के अध्यक्षों के नामों पांच जनवरी को घोषित करने वाली थी, लेकिन छह जनवरी को पुनः सूची पर विचार-विमर्श किया गया।मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विष्णु दत्त शर्मा, हितानंद ने दो घंटे तक मंथन किया था और पार्टी पदाधिकारियों सूची जारी करने की बात कही जा रही थी. इन पांच दिनों में प्रदेश नेतृत्व ने बैठक कर सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बैठाते हुए सूची तैयार की। लेकिन कुछ नामों पर सहमति नहीं बनने से यह जारी नहीं हो सकी थी

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