आदर्शों और नैतिकताओं से परिपूर्ण रहा आचार्य चाणक्य का पूरा जीवन

 

ब्राह्मण समाज ने मनाया आचार्य चाणक्य का स्मृति दिवस

नवभारत

बागली।(सुनील योगी)प्राचीन भारत के मगध राज्य के प्रधानमंत्री और प्रख्यात कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की जन्म व मृत्यु तिथि ज्ञात न होने के कारण चाणक्य सेना इंदौर के आह्वान पर नगर मे परम्परागत रूप से चाणक्य स्मृति दिवस सर्व ब्राह्मण समाज बागली के तत्वावधान में स्थानीय वाग्योग चेतना पीठम पर श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर चाणक्य के जीवन वृत पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।जहा आचार्य चाणक्य के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई।

संयोजक पंडित देवेंद्र उपाध्याय ने अपने उद्बोधन मे कहा की आचार्य चाणक्य सामाजिक समरसता के प्रबल पक्षधर व स्वाभिमान के प्रतीक थे। वे ऐसे महामंत्री थे , जिन्होनें अपने त्याग और तपस्या का मानदण्ड स्थापित किया था ।परन्तु इन्होनें न राज्य का ना राजमहल का सुख भोगा और ना ही अपने दैनिक जीवन में किसी प्रकार की प्रशासनिक सुविधा का उपयोग किया। इनका जीवन आदर्शों और नैतिकताओं से परिपूर्ण रहा।वैश्य समाज के वरिष्ठ अभिभाषक प्रवीण चौधरी ने कहा की आचार्य चाणक्य मितव्यता के पक्षधर नहीं रहे । श्री चौधरी ने तात्कालिक व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए बताया कि आज के समय में शासकीय सेवक हो या लोक सेवक अपना और अपने लोगों के लिए आर्थिक रूप से राजकोष को बड़ी हानि पहुंचाते हैं । जबकि आचार्य चाणक्य अपने कक्ष में दो दीपक प्रज्वलित करते थे। राजकीय कामकाज में राजकीय खर्चे से दीपक का प्रज्वलन होता था। और यदि निजी चर्चा करना होती तो उस दीपक को बूझाकर स्वयं के खर्चे वाला दीपक प्रज्वलित करते थे।आचार्य चाणक्य राष्ट्रभक्ति के प्रेरणापुंज है।आज की राजनीति में उनका जीवन चरित्र प्रेरणा लेने योग्य है।चौधरी ने ब्राह्मण समाज की पहल को अनुकरणीय बताया।ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष प.राकेश नागौरी ने प्राचीन ब्राह्मण ग्रन्थ मे उल्लिखित चाणक्य के जीवन वृत पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य चाणक्य की सीख से चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य वंश के माध्यम से मगध साम्राज्य को एक नया रूप दिया । इस वंश को दुनिया के शक्तिशाली वंश के रूप में स्थापित किया और खुद को एक महान राजा की छवि प्रदान की। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र राजा बिंदुसार ने भी पिता चंद्रगुप्त मौर्य की तरह आचार्य के सिखाए कदमों पर चलना सीखा।पंडित ओम गुरु शर्मा ने कहा कि आचार्य चाणक्य राजनीति के साथ नीतिशास्त्र के भी ज्ञाता थे ।आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के जीवन में भी प्रासंगिक है।इस अवसर पर

दीपक उपाध्याय,शिवराज उपाध्याय,उत्तम आचार्य,अजय उपाध्याय,माधव पंचोली,कृष्णकांत शर्मा,काव्य जोशी आदि समाजजन मौजूद थे।संचालन सोमेश उपाध्याय ने किया व आभार सत्यनारायण व्यास ने माना!

 

चाणक्य का जीवनवृत पाठ्य पुस्तक में शामिल करने की माँग-

 

कार्यक्रम के दौरान समाजजनों ने आचार्य चाणक्य का जीवनवृत व उनके सूत्रों को पाठ्य पुस्तक में शामिल करने की मांग भी की।

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