पंचायत भवनों में आधार कार्ड बनाये जाने की विधायक प्रतिनिधि ने रखी मांग
झाबुआ: आज हर व्यक्ति को विभिन्न कार्याे में आधार कार्ड जरूरी हो गया है, लेकिन आदिवासी अंचल के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है और जिनके पास है, तो उनमें से अधिकाश के आधार कार्ड में कई त्रुटिया हैं। जिस कारण उन्हें कई योजनाओं से वंचित रहना पड़ता है। आधार कार्ड बनाने या सही कराने के लिए ग्रामीणों को इन दिनों कडकडाती ठंड में शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए पोस्ट आफिस, बैंकों और कुछ चिन्हित स्थानों पर आधार कार्ड बनवाने और उसमें संशोधन कराने के लिए समय और पैसा दोनों खर्च करना पड़ रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों को सुबह 5 बजे से निर्धारित कंेद्रों पर आधार कार्ड बनाने या सुधारने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है।
कई बार बिना कार्ड बनवाए बैरंग ही लौटना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की तमाम योजनाओं जैसे रसोई गैस, बैंक खाता, राशन कार्ड, पेंशन, मनरेगा के साथ स्कूल में बच्चों के आधार कार्ड को अनिवार्य कर रखा है। अंचल में अभी भी 10 से 15 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनके आधार नहीं बन सके हैं तथा कई लोगों के आधार कार्ड में नाम व जन्म तिथि में त्रुटिया है। आधार बनवाने का कार्य ऑफिस टाइम 10 बजे के बाद ही शुरू होता है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आधार कंेद्र खुलने के 5 घंटे पहले पहंुचना पड रहा है। उसके बाद भी यह गारंटी नही की उनके आधार का काम हो जायेगा।
धन व समय की बर्बादी
पिपलीया के ग्रामीण प्रकाश मेडा, धावरिया वसुनिया ढेबर की रमीला, डुगरा की सोमलीबाई ने बताया की सुबह आधार कार्ड के लिए झाबुआ पोस्ट आफिस आए। घर का कामकाज छोड़कर आने जाने सहित समय व धन की बर्बादी हो रही है। उन्होने गांव के गरीब लोगों की परेशानियों को देखते हुए शीघ्र गांव में ही आधार कार्ड बनाने की मांग की, जिससे खासकर बच्चे और बुजुर्ग लोगों को राहत मिल सके।
ग्राम पंचायतों में बनाने की मांग
झाबुआ जनपद क्षेत्र के विधायक प्रतिनिधि एवं झाबुआ के पूर्व जनपद अध्यक्ष शंकरसिंह भूरिया ने बताया कि आधार कार्ड बनवाने और त्रुटियों को सुधरवाने को लेकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानियां झेलना पड रही है। बच्चों के आधार कार्ड के लिए कडकडाती ठंड में बच्चोे को लेकर परिजन शहर के केंद्रो पर सुबह 5 बजे से पहुंचकर चप्पलों की लाईन लगाकर केंद्र खुलने तक ठिठुरते आसानी से दिखे जा सकते है, लेकिन ठंड में परेशान हो रहे ग्रामीणों को कोई सुध नही ली जा रही है। भूरिया ने जिला प्रशासन से मांग की कि ग्रामीण क्षेत्र में हप्ते में 3-4 दिन आधार बनाने और त्रुटिया सुधारने का कार्य पंचायत भवन में करना चाहिए जिससे ग्रामीणों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी। साथ ही उन्हें ठंड में ठिठुरना भी नही पडेगा।
