
सर्दी शुरू होते ही-न्यूरोलॉजी के 20 से 25 फीसदी तक बढ़े रोगी, ठंडे पानी से नहाना भी हो सकता है खतरनाक
नवभारत/न्यूज
उज्जैन। सर्दी की दस्तक के साथ 10 ही लोग पानी पीना कम कर देते हैं। वह भी आलसजनित सोच के साथ कि बार-बार मूत्र विजर्सन के लिए जाना पड़ेगा। लेकिन यह सोच स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। इसे देखते हुए लोगों ने पानी पीना कम कर दिया है। साथ ही गरिष्ठ भोजन का सेवन भी अधिक हो लगा है। ऐसे में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इससे चिकित्सक भी चिंतित हैं। काबिले गौर तथ्य यह भी है कि नमक की मात्रा का सेवन भी सर्दी में ज्यादा होने लगता है, जो उच्च रक्तचाप को बढ़ा रहा है। इस समय न्यूरोलॉजिस्ट के घरों पर आने वाले रोगियों में 20 से 25 प्रतिशत ब्रेन स्ट्रोक के रोगी शामिल होते हैं। जबकि गर्मी के दिनों में यह संख्या कम हो जाती है। गर्मी में शरीर पानी भी खूब मांगता है । जबकि सर्दी में इसके विपरीत स्थिति हो जाती है। जिला चिकित्सालय में सैकड़ों रोगी आ रहें हैं। इसमें 20 से 25 प्रतिशत तक रोगियों में ब्रेन स्ट्रोक होने की शिकायत आती है। ऐसे मरीजों की एमआरआई तथा सिटी स्केन की जांच आवश्यक रूप से कराने के बाद ही दवा की सलाह दी जाती है।
सुबह के समय ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक
दिन के समय भी ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा रहता है। क्योंकि सर्दी में रात को भोजन करने के बाद लोग पानी कम पीते हैं और गरिष्ठ भोजन का सेवन अधिक करते हैं। पानी कम पीने के कारण खून गाढ़ा हो जाता है। खून गाढ़ा होने के कारण शरीर में इसके चलने की गति धीमी हो जाती है। इससे स्ट्रोक का खतरा बना बढ़ जाता है। इसके अलावा सर्दी में सब्जी के अलावा अन्य नमकीन आदि का भी सेवन अधिक बढ़ जाता है। इससे नमक की मात्रा भी अधिक होने से लकवा होने का खतरा रहता है। सर्दी में लोग फैट वाले खाद्य से पदार्थ अधिक खाने लगते हैं। साथ ही शारीरिक गतिविधियां भी कम हो जाती हैं। कई लोग सर्दी से बचाव के लिए धूम्रपान भी अधिक करते हैं। ब्रेन में रक्त का संचार कम होने लगता है। इन कारणों से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बचाव यही है कि गर्म कपड़े पहनें। पानी का सेवन अधिक करें।
विशेषज्ञ की सलाह
आमतौर पर एक आदमी को 24 घंटे में दो से ढाई लीटर गुनगुना पानी पीना चाहिए। कम पानी से रक्त का प्रवाह कमजोर हो जाता है। साथ ही समय से हल्का भोजन करें। नहाते समय सीधा सिर पर पानी नहीं डालें। साथ ही सुबह सीधा ही रजाई एवं कंबल से नहीं निकलें। उठने से पहले कुछ देर तक रजाई में ही बैठे रहे।
-डॉ. नरेंद्र सिंह डोडिया
