मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल द्वारा जनजातीय वर्ग के प्रति सरकारी तंत्र के रवैये पर जताई गई नाराजगी केवल एक औपचारिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह उस कड़वी सच्चाई का आईना है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है. जब राज्य का संवैधानिक प्रमुख सार्वजनिक मंच से […]
संपादकीय
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वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय अनिश्चितताओं के भंवर में फंसी हुई है, लेकिन भारत ने इस दौर में भी अपनी विकास गति को बनाए रखकर एक अलग मिसाल पेश की है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की ताजा रिपोर्टों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत न केवल […]
बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक प्रयोग का संकेत भी है. भाजपा ने उन्हें आगे कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह ओबीसी नेतृत्व को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति को और धार देना चाहती है. लेकिन सत्ता […]
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर हाल ही में लिए गए निर्णय न केवल प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाते हैं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण का संकेत भी देते हैं. 10 से 25 अप्रैल तक ‘नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा’ का आयोजन और महिला योजनाओं के लिए 240.42 करोड़ […]
रायसेन से आई यह खबर केवल एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि भारत की कृषि और रक्षा व्यवस्था के बीच एक नई साझेदारी की शुरुआत है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा यह ऐलान कि अब सैन्य छावनियों में स्थानीय किसानों से सीधे जैविक सब्जियां और फल खरीदे जाएंगे, और सेना की […]
भारतीय संगीत जगत ने आज एक ऐसी आवाज खो दी है, जिसने न केवल सुरों को जिया, बल्कि उन्हें नए अर्थ भी दिए. आशा भोंसले का निधन केवल एक महान गायिका का जाना नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा और जनमानस के उस जीवंत अध्याय का अंत है, जिसने सात दशकों […]
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय केवल एक तकनीकी फैसला नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक संकेत है. यह संकेत इस बात का है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसे हालात और […]
पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर निर्णय का असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 14 दिनों के युद्धविराम की घोषणा इसी जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य का ताजा संकेत है. यह युद्धविराम स्थायी शांति […]
मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी नाजुक और परस्पर निर्भर है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा द्वारा व्यक्त चिंता केवल एक संस्थागत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक संकट का संकेत है. धीमी होती […]