भारतीय संगीत जगत ने आज एक ऐसी आवाज खो दी है, जिसने न केवल सुरों को जिया, बल्कि उन्हें नए अर्थ भी दिए. आशा भोंसले का निधन केवल एक महान गायिका का जाना नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा और जनमानस के उस जीवंत अध्याय का अंत है, जिसने सात दशकों […]

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय केवल एक तकनीकी फैसला नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक संकेत है. यह संकेत इस बात का है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसे हालात और […]

पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर निर्णय का असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 14 दिनों के युद्धविराम की घोषणा इसी जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य का ताजा संकेत है. यह युद्धविराम स्थायी शांति […]

मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी नाजुक और परस्पर निर्भर है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा द्वारा व्यक्त चिंता केवल एक संस्थागत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक संकट का संकेत है. धीमी होती […]

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बार फिर अस्थिरता के मुहाने पर ला खड़ा किया है. इसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पडऩा स्वाभाविक है. विशेष रूप से देश के लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) इस […]

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका की भूमिका को लेकर एक बड़ा बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानियों के कारण अमेरिका पूरी दुनिया में लगभग अलग-थलग पड़ गया है. दरअसल, लंबे समय तक विश्व राजनीति का केंद्र रहे अमेरिका के सामने आज ऐसी परिस्थितियां […]

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई लेनदेन में दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन) को अनिवार्य करना एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम है. बीते कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है. पिछले माह मार्च में ही यूपीआई के माध्यम से 29.53 […]

भारत में 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बुधवार से जनगणना की प्रक्रिया का आरंभ हो गई. यह सिर्फ एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी संरचना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. स्वतंत्र भारत की 8 वीं और कुल 16 वीं जनगणना ऐसे समय में […]