जबलपुर: ओंकारेश्वर नगर पालिका के द्वारा पार्किंग ठेके वसूली के लिए जारी नोटिस को चुनौती देते हुए ठेकेदार ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट जस्टिस एम एस भट्टी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ठेकेदार ने बिना किसी दबाव स्वेच्छा से अनुबंध किया था। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता मेसर्स तनिष्का इंफ्राटेक को नगर पालिका ओंकारेश्वर ने साल 2026-27 के लिए पार्किंग का ठेका दिया था। पार्किंग ठेके के शर्तों के अनुसार उसे सात माह में ठेके की राशि जमा करनी थी। याचिकाकर्ता ने प्रथम चेक के अनादरित होने पर रोक लगा दी थी। जिसका मुख्य कारण यह था कि पार्किंग की दर एक हजार रुपये से घटाकर पांच सौ रुपये कर दी थी। इसके अलावा पार्किंग स्थल भी अपर्याप्त होना बताया गया था।
नगर पालिका की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता श्रीमती प्रीति पाठक ने एकलपीठ को बताया कि 19 अगस्त 2026 को हुए अनुबंध में उक्त शर्त निर्धारित थी। याचिकाकर्ता ने जारी किये गये प्रथम चेक पर रोक लगा दी थी। जिसके कारण उसके खिलाफ वसूली का नोटिस जारी किया गया था। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं अनुबंध में बिना दबाव हस्ताक्षर किये थे। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
