रानाघाट, 06 नवंबर (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पुराने हिंदू मंदिरों और मठों के जीर्णोद्धार एवं धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,000 करोड़ रुपये के ‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ की घोषणा की है।
यह कदम धार्मिक विरासत के संरक्षण और तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। श्री अधिकारी ने नदिया जिले के रानाघाट उत्तर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के अरंगहाटा में ‘शतदल क्लब’ की काली पूजा के उद्घाटन के दौरान यह घोषणा करते हुए कहा कि इस परियोजना में ‘देवोत्तर’ संपत्तियों (धार्मिक उद्देश्यों के लिए समर्पित संपत्ति) पर स्थित प्राचीन मंदिरों और मठों के साथ-साथ ट्रस्टों और सार्वजनिक संगठनों द्वारा प्रबंधित मंदिरों को शामिल किया जाएगा। निजी स्वामित्व वाली संपत्तियां हालांकि इस दायरे से बाहर रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1,000 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग दो वर्षों के भीतर उन धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए किया जाएगा, जिनकी अब तक उपेक्षा की गई है। इन स्थलों को तीर्थयात्रा और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा केदारनाथ, बद्रीनाथ, अयोध्या, वाराणसी में काशी-विश्वनाथ और उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के पुनर्विकास के लिए की गई पहलों का उदाहरण देते हुए कहा कि बंगाल के प्राचीन धार्मिक संस्थानों को भी सुनियोजित जीर्णोद्धार और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से एक नया जीवन मिलेगा।
यह घोषणा राज्य सरकार द्वारा प्रमुख तीर्थ स्थलों को आपस में जोड़कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत की गई है। प्रस्तावित ‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ में मायापुर, नबाद्वीप, तारापीठ, तारकेश्वर, कालीघाट, दक्षिणेश्वर और कूचबिहार का मदन मोहन जीउ मंदिर शामिल हैं। श्री अधिकारी ने बंगाल में आने वाले धार्मिक त्योहारों को एक नया रूप देने की योजना भी साझा की। जगद्धात्री पूजा के दौरान चंदननगर और कृष्णानगर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे स्वयं इन दोनों शहरों का दौरा करेंगे। आने वाले ‘रास’ उत्सव के लिए नबाद्वीप, शांतिपुर और कूचबिहार को भी विशेष रूप से सजाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह 22 नवंबर को नबाद्वीप जाएंगे, ताकि श्री चैतन्य महाप्रभु से जुड़ी इस पवित्र भूमि पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकें।
श्री अधिकारी ने गंगासागर मेले का जिक्र करते हुए कहा कि इसे पहले ही अंतरराष्ट्रीय मेले का दर्जा मिल चुका है और इस वार्षिक तीर्थयात्रा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
मुख्यमंत्री ने इस मौके का इस्तेमाल पिछली सरकार पर निशाना साधने के लिए भी किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक आयोजनों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर पिछली सरकार की आलोचना की। उन्होंने हंसखाली घटना का जिक्र करते हुए पिछली सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए और भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार महिलाओं की सुरक्षा को और बेहतर बनाएगी।
उन्होंने विशेष रूप से दुर्गा पूजा विसर्जन जुलूसों पर पहले लगाई गई पाबंदियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजकों को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा था और यहां तक कि धार्मिक जुलूसों के दौरान ‘कांसार’ (कांस्य वाद्ययंत्र) और घंटियों जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाने पर भी रोक लगा दी गई थी।
श्री अधिकारी ने दावा किया कि उनकी सरकार के आने के बाद धार्मिक आयोजनों के माहौल में बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि राज्य में दुर्गा पूजा की संख्या लगभग 13,000 से बढ़कर 58,000 हो गई है। उन्होंने कहा कि इस साल के आयोजन बिना किसी रोक-टोक या बाधा के संपन्न हुए। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि नदिया और उत्तर 24-परगना जिलों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत लंबित लगभग 2.5 लाख आवेदनों का निपटारा इस साल दिसंबर तक कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य प्रशासन ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए कदम उठाए हैं। इस संबंध में जिलाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है और उप-विभागीय अधिकारियों को सुनवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि 2023 में जब श्री अधिकारी तृणमूल कांग्रेस सरकार से जुड़े हुए थे, तब उन्होंने ‘शतदल क्लब’ की काली पूजा का उद्घाटन किया था। सरकार बदलने के बाद मुख्यमंत्री के रूप में उसी जगह पर उनकी वापसी ने शुक्रवार के कार्यक्रम को एक राजनीतिक रंग दे दिया।