उच्चतम न्यायालय ने 22,818 करोड़ रुपये के डीए बकाये को लेकर पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पर लगायी रोक, भुगतान योजना मांगा

नयी दिल्ली/चंडीगढ़, 05 नवंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब सरकार की ओर से महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के 22,818 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान नहीं करने के मामले में राज्य के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर गुरुवार को रोक लगा दी। न्यायालय ने राज्य सरकार से एक दिसंबर तक भुगतान का खाका पेश करने को कहा है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने संबंधित दीवानी अवमानना की कार्यवाही में भी किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की कुल 32,418 करोड़ रुपये की बकाया देनदारियों से जुड़े विवाद के बीच श्री सिन्हा को फिलहाल राहत मिल गयी है।

न्यायालय ने पंजाब सरकार से यह बताने को कहा है कि वह 31 मार्च 2027 तक बकाया राशि में से कितनी रकम जारी करने का प्रस्ताव रखती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगाने का मतलब भुगतान से जुड़े मूल विवाद का निपटारा करना नहीं है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार से कहा, “आपको फिलहाल राहत मिली है। सकारात्मक जवाब लेकर आइए। आप कितनी राशि जारी करेंगे?” न्यायालय ने मुख्य सचिव सिन्हा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्हें गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।

पीठ ने कहा, “आप मुख्य सचिव को जेल भेजने में क्यों रुचि रखते हैं? हम अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगा देंगे। अन्य कार्यवाही जारी रह सकती है।” यह कार्यवाही उच्च न्यायालय के तीन अगस्त के फैसले के बाद शुरू हुई थी। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार और पंजाब राज्य ऊर्जा निगम लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को राज्य में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर लागू दरों के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते तथा महंगाई राहत की लंबित किस्तें जारी करने का निर्देश दिया था।

गौरतलब है कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने दो हफ़्ते के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया था और इसके लिए 18 अगस्त की समय सीमा तय की थी और उस तारीख के बाद बकाया रकम पर सालाना छह प्रतिशत का साधारण ब्याज तय किया था। इसने सरकार को बकाया चुकाने तक बड़े पैमाने पर विज्ञापन प्रचार समेत गैर-ज़रूरी खर्च करने से भी रोक दिया था। सरकार निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं कर पाई, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स ने अवमानना की कार्रवाई के लिए याचिका दायर की। गत 12 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने अपने निर्देशों को लागू करने से रोकने वाले आधिकारिक संचार से जुड़े आरोपों की जांच के बाद आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद उच्च न्यायालय ने श्री सिन्हा को निजी तौर पर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। वहीं, बकाया न चुकाने पर अलग नागरिक अवमानना की कार्रवाई जारी रही।

उच्च न्यायालय ने गुरुवार की सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या सरकार का एक अंदरूनी संचार (जिसमें विभागों को निर्देश लागू न करने की सलाह दी गयी हो, जबकि राज्य कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर रहा हो) खुद आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को सही ठहरा सकता है।
पंजाब सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अवमानना की कार्रवाई के खिलाफ दलील दी। इस विवाद के वित्तीय असर सिन्हा द्वारा उच्च न्यायालय के सामने पेश की गयी स्टेटस रिपोर्ट से सामने आए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक जुलाई, 2021 से 30 सितंबर, 2026 के बीच पंजाब की बकाया डीए और डीआर देनदारी 22,818 करोड़ रुपये थी। कर्मचारियों और पेंशनरों के प्रति कुल बकाया देनदारी 32,418 करोड़ रुपये होने का अनुमान था, जबकि केंद्र सरकार की दरों पर डीए का पेमेंट करने से लगभग 4,712 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ पड़ेगा। सरकार ने बकाया चुकाने में वित्तीय दिक्कतों का हवाला दिया है। पिछली कार्यवाही के दौरान, उसके वकील ने कहा था कि मौजूदा सरकार को पिछली सरकार से लगभग 13,000 करोड़ रुपये का बकाया विरासत में मिला है।

उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया था कि वित्तीय मुश्किलें या ब्याज का प्रावधान भुगतान को अनिश्चित काल के लिए टालने को सही ठहरा सकता है। उसने कहा कि बकाया चुकाने की ज़िम्मेदारी तब तक बनी रहेगी जब तक उच्चतम न्यायालय उसके निर्देशों पर रोक नहीं लगाता या उनमें बदलाव नहीं करता। गुरुवार का आदेश आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को स्थगित करता है और अधिकारियों को नागरिक अवमानना के मामले में ज़बरदस्ती की कार्रवाई से बचाता है, लेकिन यह कर्मचारियों के बकाया दावों को रद्द करने के बराबर नहीं है। दिसंबर में जब यह मामला आएगा, तो उच्चतम न्यायालय पंजाब के प्रस्तावित भुगतान व्यवस्था की जांच करेगा।

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