बालाघाट: विकासखंड किरनापुर के ग्राम नंदोरा (पंचायत बक्कर) में ‘रेला’ नामक सांस्कृतिक मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन “आदि-जोहार” समूह के तत्वावधान में विभिन्न आदिवासी समुदायों एवं देश-विदेश से आए प्रतिभागियों के बीच सांस्कृतिक संवाद और सहभागिता के उद्देश्य से सम्पन्न हुआ।आमंत्रण आधारित (इनवाइट ओनली) इस कार्यक्रम में पूर्व पंजीकरण अनिवार्य था। प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक संचालित हुए इस आयोजन में विभिन्न देशों से 11 प्रतिभागी, भारत के अलग-अलग शहरों से 25 प्रतिभागी शामिल हुए। साथ ही कांकेर एवं नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से मुरिया समुदाय के 95 सदस्य, कवर्धा से बैगा समुदाय के 11 सदस्य, आमरागढ़ से माडिया समुदाय के 14 सदस्य तथा पश्चिम बंगाल से संथाल समुदाय के 11 सदस्यों ने भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक एवं लोक संगीत, सामूहिक नृत्य, सांस्कृतिक संवाद, कला एवं हस्तशिल्प के माध्यम से विभिन्न समुदायों ने अपनी जीवन शैली, परंपराओं और अनुभवों को साझा किया। प्रस्तुतियां मुख्यतः प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सीमित ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के साथ आयोजित की गईं।यह आयोजन पूर्णतः सामूहिक सहयोग से सम्पन्न हुआ। शहरों एवं विदेशों से आए प्रतिभागियों ने स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग प्रदान किया, वहीं आदिवासी समुदायों ने चावल, पत्तलों हेतु पत्ते तथा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए भोजन के लिए पत्तलों का उपयोग किया गया, स्थल पर कचरा पात्रों की व्यवस्था की गई तथा प्लास्टिक अपशिष्ट को पृथक एकत्र कर पुनर्चक्रण हेतु भेजा गया। पार्किंग की व्यवस्था निजी भूमि पर की गई और प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट उपलब्ध रही।
‘रेला’ का उद्देश्य सांस्कृतिक संरक्षण, ग्रामीण-शहरी संवाद, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवन दृष्टि को बढ़ावा देना रहा। आयोजकों के अनुसार यह एक मैत्रीपूर्ण सांस्कृतिक मिलन था, जिसका कोई व्यावसायिक या राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उल्लेखनीय है कि “आदि-जोहार” कोई पंजीकृत संस्था नहीं, बल्कि मित्रों का एक समूह है, जो आदिवासी समुदायों के साथ संवाद एवं सांस्कृतिक सहयोग की भावना से कार्य करता है।
