मानसा/चंडीगढ़, 5 नवंबर 2026: पंजाब में मारे गए ड्रग्स विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पिछले 22 दिनों से जारी गतिरोध और आंदोलन बुधवार को आखिरकार समाप्त हो गया। मानसा में झोटा के परिवार, संयुक्त कार्रवाई समिति और पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों—विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान व कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां—के बीच करीब पांच घंटे चली मैराथन बैठक के बाद समझौते पर मुहर लगी। समझौते के तहत राज्य सरकार ने झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने, उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी प्रदान करने तथा प्रदर्शनकारी नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेकर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री आवास के घेराव का आंदोलन स्थगित, मृतक के पार्थिव शरीर का पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में कराया जाएगा पोस्टमॉर्टम
सहमति बनने के बाद एक्शन कमेटी ने 5 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव को रद्द करने का ऐलान किया है। उल्लेखनीय है कि 13 अक्टूबर को मानसा के व्यस्त बाजार में फेसबुक लाइव सेशन के दौरान ड्रग्स विक्रेता द्वारा परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से उनका पार्थिव शरीर सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ था। अब झोटा का पोस्टमॉर्टम चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर (PGIMER) में कराया जाएगा। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले भम्मे कलां के दलजीत सिंह के परिवार को भी 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने पर सहमति बनी है।
पंजाब की सियासत में गर्माया था मुद्दा, परिवार की मांग पर मामले की जांच पहले ही सीबीआई को सौंप चुकी है राज्य सरकार
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब की राजनीति में भारी उबाल देखने को मिला था, जहां आगामी चुनावों के मद्देनजर विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने मानसा पहुंचकर परिवार से मुलाकात की थी। जनआक्रोश और संयुक्त कार्रवाई समिति की मांगों को देखते हुए पंजाब सरकार पहले ही मामले से संबंधित एसएचओ, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित कर चुकी है तथा जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई थी। सरकार द्वारा सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद क्षेत्र में शांति बहाल होने और आंदोलनकारियों के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

