इंदौर: शहर में तेजी से बढ़ती वाहन संख्या के बीच यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराने लगी है. शाम होते ही प्रमुख मार्गों पर लगने वाले लंबे जाम आमजन के लिए मुसीबत बन रहे हैं. लेकिन यातायात विभाग और प्रशासन यातायात सुधार की ठोस नीति बना पाने में असफल साबित हो रहे हैं.शहर के मध्य क्षेत्र में जवाहर मार्ग पर सोमवार को यातायात व्यवस्था की बदहाल तस्वीर देखने को मिली. सरवटे बस स्टैंड से हाथीपाला, सियागंज, लोहा मंडी, अग्रसेन चौराहा, जवाहर मार्ग, सैफी होटल और संजय सेतु तक वाहन घंटों जाम में फंसे रहे. हालात इतने बिगड़े कि हाथीपाला से सरवटे बस स्टैंड तक करीब छह घंटे तक वाहन रेंगते रहे.
दोपहर दो बजे से रात आठ बजे तक सैकड़ों लोग जाम से निकलने की मशक्कत करते रहे. किसी को ट्रेन पकड़नी थी तो किसी को बस तक पहुंचना था, वहीं कुछ लोग अस्पताल जाने के लिए परेशान होते रहे. यातायात पुलिस के साथ स्थानीय नागरिक भी जाम खुलवाने में जुटे रहे, लेकिन राहत नहीं मिली. सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए यातायात विभाग और प्रशासन अब तक कोई ठोस दीर्घकालीन नीति क्यों नहीं बना पा रहा है. घंटों जाम में फंसे वाहनों से हजारों लीटर ईंधन की बर्बादी और प्रदूषण अलग. आखिर कब तक जनता जाम और प्रशासनिक अव्यवस्था की कीमत चुकाती रहेगी?
यह बोले नागरिक…
चारों तरफ जाम लगा था. सब दूर से घूमकर आया, यहां पर डेढ़ घंटे से फंसा हूं. माल की डिलीवरी देना है, अब पहले जैसी यातायात सुविधा नहीं रही, आए दिन यही समस्या हो रही है.
– सुनील गुप्ता, वाहन चालक
दो बजे से लेकर साढ़े सात बज चुके हैं. लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है. सैकड़ों लोग परेशान हो रहे हैं. हम लगातार यातायात खुलवाने की कोशिश कर रहे हंै.
– इरशाद खान, स्थानीय नागरिक
एक तरफ सरकार द्वारा इंधन बचाओ की अपील की जा रही है, लेकिन शहर में बढ़ते जाम की स्थिति से लाखों लीटर ईंधन व्यर्थ जल रहा है.
– पन्नालाल यादव, कार चालक
