मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद ने जीता सीनेट चुनाव, पहले मुस्लिम अमेरिकी सीनेटर बनने का रचा इतिहास

वाशिंगटन, 04 नवंबर (वार्ता) मिस्र मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र के पूर्व अधिकारी अब्दुल अल-सैयद ने बुधवार को मिशिगन में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रच दिया। वह अमेरिकी सीनेट के लिए निर्वाचित होने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी बन गए हैं। उनकी जीत के साथ वर्ष 1969 के बाद पहली बार कोई डेमोक्रेटिक चिकित्सक सीनेट का सदस्य बनेगा।

चिकित्सक श्री अल-सैयद इससे पहले डेट्रॉयट और वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभागों का नेतृत्व कर चुके हैं। ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने कहा, “मिशिगन, हमने कर दिखाया! इस महान राज्य के निर्वाचित सीनेटर के रूप में आपके सामने खड़े होकर मुझे गर्व और सम्मान महसूस हो रहा है।”

मिस्र के आप्रवासी माता-पिता के पुत्र श्री अल-सैयद ने कभी कोई निर्वाचित पद नहीं संभाला है। वर्ष 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में उन्हें दोहरे अंकों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। अब सीनेट चुनाव में उनकी जीत अमेरिकी कांग्रेस में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। मिशिगन ऐसा अहम चुनावी राज्य है, जहां वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी।

श्री अल-सैयद की जीत ऐसे समय हुई, जब चुनाव से कुछ घंटे पहले कांग्रेस सदस्य हेली स्टीवंस ने उनके खिलाफ डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हारने के बाद रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन कर दिया था।

सुश्री स्टीवंस के इस फैसले की पार्टी के कई नेताओं ने आलोचना की और उनके कई कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया। सुश्री स्टीवंस ने अपने फैसले के पीछे नफरत और वामपंथी राजनीतिक स्ट्रीमर हसन पिकर के साथ श्री अल-सैयद के संबंधों का हवाला दिया। इससे पहले वह श्री रोजर्स की आलोचना करते हुए उन्हें श्री ट्रंप के ‘खतरनाक एजेंडे’ का समर्थक बता चुकी थीं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री अल-सैयद ने सुश्री स्टीवंस के समर्थन को खारिज कर दिया और उनकी घोषणा के चार घंटे के भीतर करीब 12 लाख डॉलर का चुनावी चंदा जुटाया। उनके चुनाव प्रचार में स्वास्थ्य सेवाओं और जीवनयापन की बढ़ती लागत जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। इस दौरान उन्हें अपने मुस्लिम धर्म और गाजा में इजरायल के युद्ध को लेकर विवादों का भी सामना करना पड़ा।

श्री रोजर्स 2024 के सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एलिसा स्लॉटकिन से मामूली अंतर से हार गए थे, जबकि उसी चुनाव में श्री ट्रंप ने मिशिगन में जीत हासिल की थी। इस बार चुनाव प्रचार के दौरान रोजर्स ने श्री अल-सैयद को चरमपंथी के रूप में पेश करने की कोशिश की। श्री अल-सैयद पर मुस्लिम ब्रदरहुड नामक इस्लामी संगठन से संबंध होने के आरोप भी लगाए गए, जिन्हें उन्होंने सख्ती से खारिज किया।

चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में श्री ट्रंप और उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने मिशिगन का दौरा किया था। रिपब्लिकन पार्टी इस अहम राज्य में अपना समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। श्री ट्रंप ने श्री अल-सैयद के मुस्लिम होने को लेकर बार-बार निशाना साधा और उन्हें “हिंसक आतंकवादी” तक कहा। उन्होंने श्री अल-सैयद को उनके मध्य नाम मोहम्मद से भी संबोधित किया। श्री रोजर्स ने हालांकि श्री ट्रंप की इस टिप्पणी का समर्थन करने से इनकार कर दिया।

श्री ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री अल-सैयद ने कहा, ” मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि वह मेरा नाम कैसे उच्चारित करते हैं। मुझे इस बात की भी परवाह नहीं है कि उन्हें मेरा पूरा नाम याद रहता है या नहीं। नवंबर के बाद वह मुझे सीनेटर कहकर बुला सकते हैं। आपके लिए मैं सीनेटर मोहम्मद रहूंगा।”

हसन पिकर के साथ अपने संबंधों को लेकर हुई आलोचना के बाद श्री अल-सैयद ने अपने चुनाव प्रचार को उनसे अलग रखने की भी कोशिश की।

इस बीच, उनके अभियान को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, पूर्व उप राष्ट्रपति कमला हैरिस और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई अन्य प्रमुख नेताओं का समर्थन मिला।

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