कोर्ट के आदेश को ठेंगा, पुलिस के सामने डंडे लेकर पहुंची महिला

लामटा, न्यायालय द्वारा जमीन के आधिपत्य को लेकर पारित स्थगन आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर हस्तक्षेप और मारपीट की कोशिश किए जाने का गंभीर मामला सामने आया हंै। मामला लामता तहसील के ग्राम पांडेवाड़ा स्थित करीब 41.13 एकड़ कृषि भूमि से जुड़ा हंै। इस मामले में न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होने, पुलिस की मौजूदगी में लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर हमला करने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए आवेदक सत्यानंद द्विवेदी, सुनील असाटी ने जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की हैं।

जानकारी अनुसार, सत्यानंद द्विवेदी जो संबंधित व्यवहार वाद में वादी पक्ष स्व. घनश्यामदास असाटी के संतान श्रीमती बसंतीबाई, सुनिल, रजनीश, प्रीति असाटी, अनमोल असाटी, मानसी असाटी की ओर से अधिकृत मुख्तार बताए गए हैं, ने 3 नवंबर 2026 को कलेक्टर बालाघाट के नाम शिकायत प्रस्तुत की हंै। जिसमें रतिराम सिरसाम, श्ंाकरलाल सिरसाम, टेकचंद सिरसाम, लेखचंद सिरसाम, तिलकचंद मडावी, तीजूलाल इडपांचे, श्रीमती रामोबाई मडा़वी, मनीराम टेकाम, रेवनीबाई, धनवताबाई इड़पांचे और आंनद असाटी लामता निवासी के विरूद्ध शिकायत साथ ही तहसीलदार लामता और थाना प्रभारी लामता की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए न्यायालय के स्थगन आदेश का कड़ाई से पालन कराने तथा विवादित भूमि पर फसल कटाई के दौरान पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई हैं।

स्थगन आदेश के बाद धान कटाई कर रहें ग्रामीण…

शिकायत के अनुसार, पंचम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड, बालाघाट के न्यायालय में व्यवहार वाद क्रमांक 1393/2026 विचाराधीन है । इस प्रकरण में न्यायालय द्वारा 8 सितंबर 2026 को स्थगन आदेश पारित किया गया था। ग्राम पांडेवाड़ा स्थित विवादित भूमि, जिसका रकबा शिकायत में 41.13 एकड़ बताया गया है, पर वादी पक्ष के आधिपत्य में हस्तक्षेप करने अथवा करवाने से प्रतिबंधित किया गया है ।

न्यायालय द्वारा वादी पक्ष के आधिपत्य को मान्यता देते हुए स्थगन आदेश पारित किया गया हैं। ऐसे में संबंधित भूमि पर बोई गई धान की फसल की देखरेख और कटाई कराने का अधिकार वादी पक्ष को हंै। वर्तमान में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है और कटाई के समय अब ग्रामीण महिलाए सामने आकर धान कटाई कर रहीं हैं और इसी वजह से विवाद और अधिक गंभीर हो गया है।

पुलिस पर गंभीर आरोप…

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण महिलाओं के द्वारा पुलिस की मौजूदगी में ही उसके और मजदूरों के साथ मारपीट करने का प्रयास किया। इस दौरान गाली-गलौज करते हुए फसल काटने के लिए दोबारा आने पर जान से खत्म करने की धमकी भी दी गई। शिकायत में कहा गया हैं कि आरोपियों ने न्यायालय और पुलिस के आदेशों को नहीं मानने की बात कहते हुए खुलेआम चुनौती दी।

बालाघाट में बैठे व्यक्ति पर उकसाने का आरोप…

सुनिल असाटी ने 11 आनंद असाटी निवासी बालाघाट पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति बालाघाट में बैठकर अन्य भोलेभाले आदिवासियों को लगातार उकसा रहा हैं और लाठी-डंडों तथा हथियारों के बल पर फसल कटाई रोकने के लिए कह रहा हैं। साथ ही कथित तौर पर उन्हें आश्वस्त किया जा रहा है कि कोर्ट-कचहरी और पुलिस की व्यवस्था वह संभाल लेगा। उन्होने यह भी कहा कि इसी उकसावे के चलते अन्य आदिवासी आक्रामक रुख अपना रहे हैं और न्यायालय के आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर हस्तक्षेप कर रहे हैं। बताया जा रहा हैं कि यह दोनों पक्षों के बीच पहले से ही लम्बे समय से विवाद चल रहा हैं।

कलेक्टर से तीन प्रमुख मांगें…

सत्यानंद द्विवेदी एवं सुनील असाटी ने कलेक्टर से मांग की है कि तहसीलदार लामता और थाना प्रभारी लामता को न्यायालय द्वारा 8 सितंबर को पारित स्थगन आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए जाएं। पुलिस की मौजूदगी में कथित तौर पर हथियार लेकर हमला करने, जान से मारने की धमकी देने और न्यायालयीन आदेश का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा ग्राम पांडेवाड़ा स्थित विवादित 41.13 एकड़ भूमि पर वादी पक्ष को अपनी पकी हुई धान की फसल शांतिपूर्वक कटवाने के लिए पर्याप्त राजस्व अमला और सशस्त्र पुलिस बल की सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

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