
बालाघाट। तेंदूपत्ता समिति के अंतर्गत कराए गए भवन निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर विवाद सामने आया है। वर्ष 2023 में कराए गए निर्माण कार्यों की लाखों रुपये की राशि अब तक बकाया होने का आरोप ठेकेदार ने लगाया है। ठेकेदार पवन वैद्य ने कटंगी रेंजर बाबूलाल चडार पर भुगतान में टालमटोल करने और मजदूरी की राशि के लेन-देन में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ठेकेदार का कहना है कि करीब 32 लाख रुपये की लागत से निर्माण कार्य पूरे कराने के बावजूद उन्हें आधे से भी कम राशि प्राप्त हुई है।
ठेकेदार पवन वैद्य के अनुसार, वर्ष 2023 में कटंगी रेंजर बाबूलाल चडार द्वारा उन्हें 850 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से निर्माण कार्य सौंपे गए थे। इनमें सामुदायिक भवन तिरोड़ी, खादीटोला समिति कार्यालय तिरोड़ी, सामुदायिक भवन लिंगापौन तथा समिति कार्यालय सीतापुर का निर्माण शामिल है। ठेकेदार का दावा है कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरे कर दिए गए थे और सामग्री सहित इनकी कुल लागत लगभग 32 लाख रुपये थी।
32 लाख के काम में आधे से भी कम भुगतान मिलने का आरोप
पवन वैद्य का आरोप है कि निर्माण कार्यों की कुल लागत लगभग 32 लाख रुपये होने के बावजूद उन्हें अब तक आधे से भी कम राशि प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि मजदूरी भुगतान के लिए लगभग 11 लाख रुपये का हिसाब था, जिसमें से करीब 7.50 लाख रुपये मजदूरों के खातों में जमा कराए गए। उनका आरोप है कि इस राशि में से कुछ रकम मजदूरों के खातों से वापस लिए जाने की बात भी सामने आई है। इस पूरे लेन-देन की जांच की मांग की गई है।
किश्तों में भुगतान देने का दावा, शेष राशि अब भी बकाया
ठेकेदार के मुताबिक, रेंजर बाबूलाल चडार द्वारा उन्हें लगभग 7 लाख रुपये 10 हजार और 5 हजार रुपये की छोटी-छोटी किश्तों में फोन के माध्यम से दिए गए। इसके बावजूद शेष भुगतान नहीं किया गया। पवन वैद्य का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा करने के बाद भी उन्हें अपनी बकाया राशि के लिए लगातार प्रयास करने पड़ रहे हैं।
भोपाल से बालाघाट तक अधिकारियों से की चर्चा
ठेकेदार ने बताया कि भुगतान की समस्या को लेकर उन्होंने भोपाल से लेकर बालाघाट तक विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया। उनके अनुसार, अधिकारियों की ओर से कहा गया कि उक्त कार्य का कोई टेंडर जारी नहीं हुआ था और भुगतान उसी व्यक्ति से प्राप्त करें, जिसने काम सौंपा था। इसके बाद जब उन्होंने रेंजर बाबूलाल चडार से भुगतान के संबंध में चर्चा की तो ठेकेदार के मुताबिक, रेंजर ने किसी ठेकेदार से निर्माण कार्य कराने की बात से इनकार कर दिया।
रेंजर के इनकार के बाद उठे सवाल
इस मामले में अब कई सवाल सामने आ रहे हैं। यदि रेंजर द्वारा किसी ठेकेदार से निर्माण कार्य नहीं कराया गया, तो फिर निर्माण कार्यों का भुगतान किस आधार पर हुआ? मजदूरों के खातों में जमा कराई गई राशि का स्रोत और उसका वास्तविक हिसाब क्या है? ठेकेदार को किश्तों में भुगतान किए जाने का दावा किस मद के अंतर्गत किया गया? इन सभी बिंदुओं की विभागीय जांच आवश्यक बताई जा रही है।
निष्पक्ष जांच और बकाया भुगतान की मांग
ठेकेदार पवन वैद्य ने वरिष्ठ वन अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों के दस्तावेज, भुगतान रजिस्टर, मजदूरों के बैंक खाते और विभागीय अभिलेखों का मिलान कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और उनकी बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
अब देखना होगा कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को लेकर क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल ठेकेदार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित रेंजर का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
