नयी दिल्ली, (वार्ता) चावल निर्यातकों की आशंका है कि वैश्विक बाजार में टुकड़ा चावल की कीमतों में तेजी तथा एथेनाल और चारा उद्योग में चावल की बढ़ती मांग के बीच राज्यों के चुनावों से पहले महंगाई की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार टूटे चावल के निर्यात पर कुछ पाबंदियां लगा सकती है।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) ने मंगलवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 प्रतिशत चावल अुकड़ा (ब्रोकन राइस) के भाव 360 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंचने के बाद भारत सरकार इसके निर्यात पर फिर से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है। आईआरईएफ का कहना है कि कीमतों में यह तेजी इथेनॉल निर्माताओं, पोल्ट्री फीड उत्पादकों और विदेशी खरीदारों की ओर से बढ़ती मांग के कारण आयी है।
बाजार में तीन सप्ताह से कुछ अधिक समय में चावल टुकड़ा का थोक भाव 5.3 प्रतिशत चढ़ चुका है। सरकार उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में अगले साल के शुरू में होने जा रहे विधान सभा चुनावों से पहले अनाजों की महंगाई के मोर्चें पर जोखिम नहीं लेना चाहेगी।
आईआरईएफ की एक विज्ञप्ति में उपभोक्ता मामलों के विभाग के हवाले से कहा गया है कि घरेलू बाजार में चावल टुकड़ा का औसत थोक भाव बढ़ कर 2 नवंबर को 3,036 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, जबकि 10 अक्टूबर को यह 2,883 रुपये प्रति क्विंटल था। चावल टुकड़ा सितंबर 2026 में सालाना आधार पर 5.38 प्रतिशत महंगा हो गया था जबकि अगस्त में भाव सालाना आधार पर 4.37 प्रतिशत अधिक थे।
आईआरईएफ के अनुसार इससे घरेलू बाजार में कीमतों पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। संगठन के महानिदेशक विनोद कौल ने कहा, ” चावल टुकड़ा का भाव 360 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंचना चिंता का विषय है। इसका इस्तेमाल अब एथेनॉल निर्माण, पोल्ट्री फीड और कई अन्य उद्योगों में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चे माल के रूप में हो रहा है। घरेलू उद्योगों और निर्यात बाजारों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के विस्तार से अनाज आधारित कच्चे माल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें टुकड़ा चावल , मक्का और भारतीय खाद्य निगम द्वारा जारी किया जाने वाला अतिरिक्त चावल शामिल है। व्यावसायिक डिस्टिलरी खुले बाजार से भी कच्चे माल की खरीद करती हैं। इससे पोल्ट्री फीड निर्माताओं और निर्यातकों के साथ उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।
आईआरईएफ का कहना है कि चावल टुकड़ा महंगा होने से एथेनाल और चार उद्योगों की उत्पादन लागत प्रभावित हो सकती है, जिससे व्यापक स्तर पर महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। सितंबर 2022 में घरेलू उपलब्धता और मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने टुकड़ा चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था जो मार्च 2025 तक लागू रहा।
संगठन के अनुसार भारत में कुल चावल की उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। वर्ष 2025-26 में चावल का रिकॉर्ड उत्पादन 15.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 15.02 करोड़ टन था। देश ने वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 2.16 करोड़ टन चावल का निर्यात भी किया और दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी।
निर्यातकों को हालांकि लगता है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण कृषि जिंसों की कीमतों और महंगाई को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता और बढ़ सकती है। श्री कौल ने आगे कहा: “घरेलू कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और इथेनॉल निर्माण के लिए पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकताएं हैं। प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ महंगाई को लेकर संवेदनशीलता बढ़ सकती है। ये सभी कारक मिलकर सरकार के हस्तक्षेप की संभावना को बढ़ाते हैं, हालांकि अभी तक निर्यात पर कोई नया प्रतिबंध घोषित नहीं किया गया है।”
