ब्यावरा। इस बार जल स्त्रोंतो में पानी की अच्छी खासी उपलब्धता है इससे रबि सीजन में गेहूं की सर्वाधिक बोवनी के आसार है. गेहूं और सरसों का रकबा इस बार बढ़ रहा है तो चना और मसूर का रकबा कम हो रहा है, क्योंकि इन दो फसल को जानवर एवं रोग से नुकसान होने का भय रहता है जिसके चलते चना और मसूर का रकबा इस मर्तबा कम हो रहा है.
वर्तमान में रबि सीजन की बोवनी का कार्य जारी है. गेहूं, सरसों की बोवनी क्षेत्र में अधिक की जा रही है. गत वर्ष ब्यावरा ब्लॉक में गेहूं का रकबा करीब 65 हजार हेक्टर रहा था. जबकि इस बार गेहूं का अनुमानित रकबा 76 हजार 650 हेक्टर रहने की उम्मीद है. सरसों का अनुमानित रकबा इस बार 3 हजार 735 हेक्टर एवं चना का रकबा घटकर 633 हेक्टर तथा मसूर का रकबा 2925 हेक्टर रहने की उम्मीद है.
जानवर कर जाते है फसल चट
चना फसल की बोवनी के साथ ही जानवरों का प्रकोप बढ़ जाता है. जंगली सुअर एवं अन्य जानवर खेतों में चना फसल पर टूट पड़ते है. इनके द्वारा गत वर्ष एवं पूर्व के वर्षो में क्षेत्र में चना फसल को भारी नुकसान पहुंचाया. जबकि मसूर फसल में उकटा नामक रोग लग जाता है. जिसमें फसल की जड़ सडक़र पौधा खराब हो जाता है. यही कारण है कि इन कारणों के चलते इस बार चना एवं मसूर फसल की बोवनी का रकबा कम होना सामने आ रहा है. इसकी जगह गेहूं एवं सरसों के रकबे में बढ़ोत्तरी हो रही है.
ब्यावरा ब्लॉक में इस रबि सीजन में गत वर्ष की तुलना में गेहूं का रकबा 8 हजार हेक्टर से अधिक बढऩे की उम्मीद है. सरसों का रकबा भी बढ़ रहा है.
एन.एस. हरियाले
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी
