जबलपुर:कछपुरा रेल साइडिंग मालगोदाम से फैल रहे धूल प्रदूषण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में महत्वपूर्ण जवाब पेश किया है। बोर्ड ने स्वीकार किया है कि मालगोदाम में बड़े वाहनों की आवाजाही और लोडिंग- अनलोडिंग के कारण अत्यधिक धूल उत्सर्जित हो रही है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए रेलवे ने कोई समुचित उपाय नहीं किए हैं। इतना ही नहीं, फूड ग्रेन की लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति के बावजूद यहां सीमेंट की भी लोडिंग- अनलोडिंग की जा रही है।
पौधारोपण तक नहीं कराया
मालगोदाम के चारों ओर धूल नियंत्रण के लिए पौधारोपण तक नहीं कराया गया है। बोर्ड ने इस संबंध में डीआरएम को नोटिस भी जारी किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता पारुल भदोरिया ने एनजीटी में यह जवाब प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने 20 अप्रैल 2026 को कछपुरा रेल साइडिंग का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बड़े वाहनों की आवाजाही और माल की लोडिंग-अनलोडिंग से अत्यधिक धूल उत्सर्जन पाया गया। वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए रेलवे की ओर से आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए थे। इससे आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या निर्मित हो रही है। निरीक्षण में फूड ग्रेन के साथ सीमेंट की लोडिंग-अनलोडिंग भी सामने आई। डस्ट उत्सर्जन नियंत्रित करने के पर्याप्त उपाय नहीं मिले और रेल साइडिंग के चारों ओर पौधारोपण भी नहीं किया गया था।
अवमानना याचिका में गंभीर आरोप
उल्लेखनीय है कि डा. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने एनजीटी में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि कछपुरा मालगोदाम से उठने वाले धूल के गुबार ने आसपास रहने वाले करीब 50 हजार लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। याचिका में बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 अप्रैल 2023 को केवल फूड ग्रेन की लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति दी थी, लेकिन इसके बावजूद सीमेंट और आयरन ओर की भी लोडिंग-अनलोडिंग की जा रही है। एनजीटी ने याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।
तीन सप्ताह के भीतर देना होगा जवाब
अधिवक्ता प्रभात यादव के अनुसार, एनजीटी ने रेलवे सहित अन्य संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
